भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधियों की अब खैर नहीं!
राज्य में पहली बार साइबर क्राइम से लड़ने के लिए खास कमांडो तैयार किए जा रहे हैं। ये कमांडो अफवाह फैलाने वालों से लेकर ऑनलाइन ठगी करने वालों तक पर शिकंजा कसेंगे।
हर 6 महीने में 7 पुलिस अफसर बनेंगे साइबर कमांडो
प्रदेश में हर छह महीने में 7 पुलिस अफसरों और जवानों को साइबर कमांडो की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे IIT और IIM में छह महीने का कोर्स कराया जा रहा है।
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पहले बैच में ASP कवि गुप्ता, SI अपराजिता राणा, ASI, एक हवलदार और तीन सिपाही शामिल हैं। ये सभी अलग-अलग संस्थानों में ट्रेनिंग लेकर लौट चुके हैं। अब जून के अंत तक 6 और जवानों को ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा।
अफवाह फैलाने वालों की करेंगे पहचान
साइबर कमांडो सोशल मीडिया पर देशद्रोह, नफरत फैलाने या झूठी खबरें फैलाने वालों की पहचान करेंगे। वहीं, 200 साइबर वॉलंटियर्स भी तैयार किए गए हैं, जिनमें सेना से रिटायर्ड अफसर, आम नागरिक और साइबर एक्सपर्ट शामिल हैं।
इन संस्थानों से मिल रही ट्रेनिंग
ट्रेनिंग के लिए IIT मद्रास, IIT कानपुर, IIIT कोट्टायम, IIIT नवा रायपुर, RRU गांधीनगर, DIAT पुणे, NFSU गांधीनगर और दिल्ली के संस्थानों का चयन किया गया है। इनका चयन इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर द्वारा किया गया है।
रायपुर में 4 हजार से ज्यादा साइबर क्राइम हर साल
राजधानी रायपुर में हर साल 4000 से ज्यादा साइबर क्राइम दर्ज होते हैं। इनमें 2000 से अधिक मामले सीधे क्राइम पोर्टल पर दर्ज किए जाते हैं। स्थानीय लोगों में इस बढ़ती संख्या को लेकर चिंता है।
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ADG तकनीकी सेवा प्रदीप गुप्ता ने दी जानकारी
उन्होंने बताया कि पहले बैच की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है और अगला बैच जल्द भेजा जाएगा। इससे साइबर क्राइम को सुलझाने में काफी मदद मिलेगी।
क्या-क्या करेंगे साइबर कमांडो?
🔹 मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया चैट से डिजिटल सबूत जुटाएंगे।
🔹 ऑनलाइन फ्रॉड, हैकिंग, डेटा चोरी से बचाव के लिए जागरूकता फैलाएंगे।
🔹 तकनीकी जांच में पुलिस की मदद करेंगे – मोबाइल क्लोनिंग, आईपी ट्रैकिंग से।
🔹 साइबर क्रिमिनल की पहचान कर उन पर नजर रखेंगे।
🔹 हैकिंग, मैलवेयर की जांच कर अपराधियों तक पहुंचेंगे।
🔹 साइबर बुलिंग, फर्जी ID जैसी समस्याओं से पीड़ितों की मदद करेंगे।
क्या नहीं कर सकेंगे साइबर कमांडो?
🔸 किसी को गिरफ्तार या पूछताछ करने का कानूनी अधिकार नहीं होगा।
🔸 केस दर्ज नहीं कर सकते, केवल पुलिस को जानकारी दे सकते हैं।
🔸 बिना वारंट फोन, कंप्यूटर या सोशल मीडिया अकाउंट नहीं देख सकते।
🔸 किसी सिस्टम को हैक करने या खाते के लेनदेन को रोकने का अधिकार नहीं होगा।
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