दुर्ग।मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने पहुंचे 10वीं के एक छात्र की शिकायत के बाद दुर्ग जिले में बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि जांच के दौरान डॉक्टर ने छात्र के साथ कथित अभद्र हरकत की।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब प्रशासन ने संबंधित एडॉप्शन सेंटर की भी जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। बताया गया है कि डॉक्टर सेवा भारती मातृ छाया एडॉप्शन सेंटर का संचालक भी है। घटना इसी सेंटर में हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने महिला एवं बाल विकास विभाग को सेंटर की जांच करने और उसका पंजीयन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि इसी सेंटर से विदेश समेत कई राज्यों में 12 बच्चों को गोद दिया जा चुका है।
जानकारी के मुताबिक आरोपी डॉक्टर मूल रूप से महाराष्ट्र का रहने वाला है और उसने आयुर्वेद चिकित्सा (बीएएमएस) की डिग्री प्राप्त की है। उसकी पत्नी भी डॉक्टर हैं और ग्राम अंडा में संविदा पर पदस्थ हैं। दोनों पति-पत्नी मिलकर सेवा भारती मातृ छाया एडॉप्शन सेंटर का संचालन करते हैं।
पुलिस के अनुसार, शुक्रवार (24 जुलाई) दोपहर 10वीं कक्षा का छात्र अपने दोस्त का मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए बोरसी स्थित एडॉप्शन सेंटर पहुंचा था। इसी दौरान उसके साथ कथित अभद्र हरकत होने का आरोप लगाया गया है।
छात्र वहां से निकलकर अपने घर पहुंचा और परिवार को पूरी जानकारी दी। इसके बाद परिजन उसे लेकर पद्मनाभपुर थाना पहुंचे, जहां लिखित शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपी डॉक्टर से पूछताछ की। इसके बाद शनिवार (25 जुलाई) को उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
पुलिस का कहना है कि जांच केवल क्लीनिक तक सीमित नहीं रहेगी। आरोपी जिस मातृ छाया एडॉप्शन सेंटर का संचालन करता है, उसकी कार्यप्रणाली की भी जांच की जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि सेंटर का संचालन निर्धारित नियमों के अनुरूप किया जा रहा था या नहीं।
मातृ छाया एडॉप्शन सेंटर राज्य के बड़े एडॉप्शन सेंटरों में शामिल है। यहां अनाथ और बेसहारा बच्चों की देखभाल की जाती है। बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया जिला प्रशासन और कलेक्टर कार्यालय की निगरानी में पूरी होती है।
बताया जा रहा है कि इस सेंटर से अब तक 12 से अधिक बच्चों को गोद दिया जा चुका है। इनमें कुछ बच्चों को विदेशी परिवारों ने भी गोद लिया है। कुछ महीने पहले महाराष्ट्र की एक महिला जज ने भी इसी सेंटर से दो बच्चों को गोद लिया था।
घटना की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह ने महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को एडॉप्शन सेंटर भेजकर जांच के निर्देश दिए। साथ ही सेंटर का पंजीयन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी कहा है।
प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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