CG : पिता की हत्या की गवाह बनी 6 साल की मासूम, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा, हाईकोर्ट ने भी ठहराया बयान को भरोसेमंद..

 


भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : बिलासपुर में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 6 साल की बच्ची की आंखों देखी गवाही पर दी गई उम्रकैद की सजा।

(CG) पिता की हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने 6 साल की मासूम की गवाही को पक्का और भरोसेमंद सबूत मानते हुए दो आरोपियों की अपील को खारिज कर दिया है। बच्ची के बयान को अदालत ने इस कदर गंभीरता से लिया कि किसी अन्य साक्ष्य की आवश्यकता तक नहीं पड़ी।

यह मामला जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच में सुना गया। कोर्ट ने साफ कहा कि बाल गवाह की आँखों देखी घटना ही इस मामले को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है। 

बिलासपुर हाईकोर्ट फैसला - 6 साल की बच्ची की गवाही बनी हत्या का अहम सबूत

घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और पड़ोसी मौके पर पहुंचे थे।

पुलिस ने बच्ची के बयान के आधार पर मृतक की पत्नी सगोर बाई और आरोपी पंकू के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 और 34 के तहत दर्ज किया गया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया।

अपर सत्र न्यायाधीश ने बच्ची की साफ और स्थिर गवाही को आधार बनाते हुए दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी।

अपील में आरोप लगाया गया था कि 6 साल की बच्ची का बयान अविश्वसनीय है और वह भी काफी देर से दर्ज किया गया। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को नकार दिया।

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क्या था बच्ची का बयान?

बच्ची ने बताया कि घटना के दिन पंकू ने उसके पिता के पेट पर वार किया और उसकी मां, जो उस समय चूल्हे के पास बैठी थी, ने अपने दुपट्टे से पिता का गला घोंट दिया। इसके बाद पिता को देवता कक्ष में ले जाकर बीच वाले बीम से लटका दिया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि इस उम्र की बच्ची, जो खुद घटना की प्रत्यक्षदर्शी है, उसकी गवाही पुष्टिकरण की मोहताज नहीं होती। कोर्ट ने इसे पूरी तरह विश्वसनीय माना।

डिवीजन बेंच ने आरोपियों को विधिक सेवा प्राधिकरण समिति की सहायता से सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की छूट जरूर दी है।

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