भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : फैक्ट्री में इंसान नहीं, जैसे जानवरों की तरह रखा गया...
रायपुर की एक मशरूम फैक्ट्री में दर्दनाक हकीकत सामने आई है, जहां यूपी, बिहार, झारखंड और एमपी से लाए गए मजदूरों को बंधक बनाकर दिन-रात काम करवाया जा रहा था। महिला-बाल विकास विभाग ने 97 मजदूरों को रेस्क्यू कर इस अमानवीय कांड का खुलासा किया।
शौच तक जाते समय रखी जाती थी नजर
जौनपुर से लाई गई एक महिला मजदूर ने बताया कि उन्हें शौच के लिए बाहर जाने पर भी निगरानी में रखा जाता था, ताकि वे भाग न जाएं। विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट होती थी। खाना मांगने पर बच्चों तक को पाइप से पीटा गया।
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न काम की तय राशि मिली, न इंसानियत
मजदूर वीरेंद्र ने बताया कि उन्हें महीने के 10,000 देने का वादा किया गया था, लेकिन 5 महीने तक बिना वेतन के काम करवाया गया। रोज 16-18 घंटे मशरूम काटने और बोझा ढोने का काम लिया गया। नींद में भी पीटा जाता था।
खाना भी कच्चा, दरवाजे हमेशा बंद
मजदूरों को शाम 4 बजे जो खाना मिलता था, वह कच्चा होता था। फैक्ट्री से बाहर निकलना मना था। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर नाराज़गी है।
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कुछ मजदूरों की हिम्मत ने बचाई जान
2 जुलाई को कुछ मजदूर अंधेरे में फैक्ट्री से भाग निकले और 15–20 किमी पैदल चलकर रायपुर पहुंचे। भाठागांव बस स्टैंड पर स्थानीय लोगों ने उनकी हालत देखकर मदद की और पुलिस तक पहुंचाया।
आधार और मोबाइल तक छीन लिए गए थे
मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्री मालिकों ने उनके मोबाइल और आधार कार्ड तक छीन लिए थे। उन्हें एक रुपए की मजदूरी नहीं दी गई और जानवरों जैसा व्यवहार किया गया।
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ब्लेड से हमला और बच्चों पर जुल्म
एक मजदूर ने बताया कि नितेश तिवारी नाम के मालिक ने उसकी उंगली पर ब्लेड चला दिया। 10 दिन का बच्चा तक बंधक था, जिसे मां ने फैक्ट्री में ही जन्म दिया था। उसके शरीर पर चोट के निशान थे।
फैक्ट्री का नाम 'मारुति फ्रेश', पता पिकरीडीह गांव
फैक्ट्री का नाम ‘मारुति फ्रेश’ है, जो खरोरा के पिकरीडीह गांव में उमाश्री राइस मिल के पास स्थित है। रेस्क्यू के बाद एक शख्स मजदूरों को पैसे और ट्रेन टिकट देकर मामला रफा-दफा करने पहुंचा।
प्रशासन की रेड, लेकिन श्रम विभाग नदारद
महिला एवं बाल विकास विभाग ने फैक्ट्री में रेड कर सभी मजदूरों को छुड़ाया। अधिकारी शैल ठाकुर ने बताया कि शोषण की जांच की जा रही है। वहीं, श्रम विभाग के किसी अधिकारी ने फोन तक नहीं उठाया और मौके पर भी नहीं पहुंचे।
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