ग्रामीणों के बीच इन मौतों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। गांव में तंत्र-मंत्र, गड़ा धन और नरबलि जैसी आशंकाओं की बातें भी सामने आई हैं। जब लगातार चार लोगों की मौत हुई थी, तब ग्रामीणों को लगा कि देवी-देवता नाराज हैं।
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसके बाद गांव में सामूहिक रूप से शांति पूजा कराई गई। पूजा के दौरान 3 बकरे, 1 सुअर और कई मुर्गों की बलि दी गई। हालांकि इसके बाद भी मौतों का सिलसिला नहीं रुका। ग्रामीणों का दावा है कि जमीन में गड़े धन के लिए 21 नरबलि की तैयारी की जा रही थी।
खर्वे गांव में मौतों का सिलसिला 6 फरवरी 2026 को बद्री पटेल की मौत से शुरू हुआ। इसके बाद 20 फरवरी को बुढालू साहू की मौत हुई। 12 मार्च को बुधराम जायसवाल, 20 मार्च को छत्तूराम साहू और 31 मार्च को विनोद साहू की जान चली गई।
इसके बाद 28 अप्रैल को गजानंद मांझी और 29 अप्रैल को चैतूराम साहू की मौत हुई। सबसे हालिया मामला 14 मई को महेतरू साहू की मौत का है। महज तीन महीने के भीतर 8 मौतों के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण कसडोल थाने पहुंचे थे।
मृतक चैतू साहू के भाई और विनोद साहू के चाचा कामता प्रसाद ने आरोप लगाया कि जिन लोगों की मौत हुई, उन्हें अलग-अलग समय पर रामसहाय जायसवाल ने शराब दी थी। उनका कहना है कि शराब पीने के कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई।
गांव में सबसे ज्यादा चर्चा गजानंद मांझी की मौत को लेकर हो रही है। गजानंद वही व्यक्ति थे जिन्होंने गांव में शांति पूजा कराई थी। परिवार का दावा है कि घटना वाले दिन उन्हें शराब दी गई थी।
गजानंद मांझी की पत्नी साधिन बाई मांझी के अनुसार, उनके पति दोपहर में घर पर आराम कर रहे थे। इसी दौरान मोहनलाल जायसवाल शराब लेकर पहुंचे और उन्हें जगाया। बाद में गजानंद ने कोल्ड ड्रिंक में शराब मिलाकर पी। कुछ देर बाद उन्होंने रोटी का निवाला मुंह में रखा और अचानक जमीन पर गिर पड़े। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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ऑफिस से लौटते हुए राहुल ने जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला,
उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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