पुलिस प्रशासन के मुताबिक यह कार्रवाई भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय समन्वय पोर्टल (I4C) से मिले इनपुट और तकनीकी शिकायतों के आधार पर की गई है। जांच के दौरान साइबर अपराधियों के नेटवर्क से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
शुरुआती जांच में पुलिस टीम ने मोहन नगर थाना क्षेत्र में संचालित कोटक महिंद्रा बैंक के कई संदिग्ध खातों की पड़ताल की। जांच में सामने आया कि इन खातों में देश के अलग-अलग राज्यों से साइबर ठगी के जरिए प्राप्त रकम जमा की जा रही थी।
इसके बाद खाताधारकों और बिचौलियों की मदद से रकम निकाली जाती थी या फिर दूसरे डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर कर दी जाती थी। जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क की गतिविधियों पर पुलिस ने नजर रखी।
तकनीकी और दस्तावेजी विश्लेषण में यह भी सामने आया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में दुर्ग और भिलाई के कई पढ़े-लिखे युवा और युवतियां शामिल हैं।
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पुलिस जांच में पता चला कि कुछ लोगों ने कमीशन के लालच में अपने और अपने परिचितों के दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाए और बाद में उन्हें साइबर अपराधियों को सौंप दिया।
दुर्ग-भिलाई क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने का एक प्रमुख केंद्र बनकर सामने आया है। इससे पहले वर्ष 2024-25 के दौरान सुपेला और जामुल क्षेत्रों से भी पुलिस 25 से अधिक ऐसे आरोपियों को पकड़ चुकी है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उन मामलों में कॉलेज छात्रों और गरीब मजदूरों को 5 हजार से 10 हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर फर्म और चालू खाते खुलवाए जाते थे। जांच के दौरान करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध लेन-देन का खुलासा हुआ था।
पुलिस के अनुसार, पुराने मामलों में मुख्य सरगना चीन और दुबई से टेलीग्राम ऐप के माध्यम से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। फिलहाल दुर्ग पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
साइबर अपराध और आपके शहर की हर बड़ी खबर से अपडेट रहने के लिए हमारे साथ जुड़े रहें। जागरूक रहें और किसी भी लालच में आकर अपने बैंक दस्तावेज किसी को न सौंपें।
पुलिस जांच में पता चला कि कुछ लोगों ने कमीशन के लालच में अपने और अपने परिचितों के दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाए और बाद में उन्हें साइबर अपराधियों को सौंप दिया।
दुर्ग-भिलाई क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने का एक प्रमुख केंद्र बनकर सामने आया है। इससे पहले वर्ष 2024-25 के दौरान सुपेला और जामुल क्षेत्रों से भी पुलिस 25 से अधिक ऐसे आरोपियों को पकड़ चुकी है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उन मामलों में कॉलेज छात्रों और गरीब मजदूरों को 5 हजार से 10 हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर फर्म और चालू खाते खुलवाए जाते थे। जांच के दौरान करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक के अवैध लेन-देन का खुलासा हुआ था।
पुलिस के अनुसार, पुराने मामलों में मुख्य सरगना चीन और दुबई से टेलीग्राम ऐप के माध्यम से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। फिलहाल दुर्ग पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
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ऑफिस से लौटते हुए राहुल ने जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला,
उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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