भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : 👉 बेमेतरा से आई ये खबर एक बार फिर बता रही है कि अब भ्रष्टाचार नहीं चलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सख्त रुख ने सरकारी सिस्टम को झकझोर दिया है।
छत्तीसगढ़ में 'सुशासन तिहार' के तीसरे चरण में एक बड़ा एक्शन लिया गया है। बेमेतरा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत काम कर रहे तीन संविदा कर्मियों को रिश्वत मांगने और धमकाने के मामले में सेवा से हटा दिया गया है।
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पूरा मामला तब सामने आया जब एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई। इसमें ग्राम पंचायत ऐरमशाही की आवास मित्र नीरा साहू एक हितग्राही से पीएम आवास की किस्त जारी करने के एवज में 25,000 रूपये की रिश्वत मांगते सुनी गईं। तहसीलदार की जांच में नीरा साहू ने यह स्वीकार भी किया कि ऑडियो में वही हैं।
इसी प्रकरण में, ग्राम पंचायत तेंदुआ के रोजगार सहायक नारायण साहू पर भी 0,000 की मांग कर हितग्राहियों को धमकाने के प्रमाण मिले। वहीं उनकी पत्नी ईश्वरी साहू, जो खुद ऐरमशाही पंचायत में रोजगार सहायक हैं, उन पर भी ग्रामीणों ने डराकर पैसे मांगने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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नांदघाट थाना में दर्ज रिपोर्ट और जनपद पंचायत नवागढ़ के CEO की अनुशंसा पर तीनों दोषियों को तत्काल सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। कार्रवाई कलेक्टर के अनुमोदन से की गई है।
नांदघाट पुलिस ने BNSS की धारा 308(2) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे सुशासन तिहार की आत्मा बताया और कहा— "जन योजनाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी जरूरी है, कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अगर लोगों के हक का शोषण करता है, तो उसे सख्त सजा मिलेगी।"
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