बड़ी खबर : ऑपरेशन महादेव ने मचाई सनसनी! पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड हाशिम मुसा व दो पाकिस्तानी आतंकी को इन्डियन आर्मी ने किया ढेर..

 


भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : श्रीनगर के हरवान इलाके में सोमवार सुबह उस वक्त हलचल मच गई, जब सेना और सुरक्षाबलों ने एक मुठभेड़ में तीन पाकिस्तानी आतंकियों को ढेर कर दिया। 

मारे गए आतंकियों में हाशिम मूसा भी शामिल था, जो 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

कहां और कैसे हुआ एनकाउंटर:

मुठभेड़ श्रीनगर के दाचीगाम नेशनल पार्क के पास हुई। ऑपरेशन को सेना ने ‘ऑपरेशन महादेव’ नाम दिया था। इसमें 24 राष्ट्रीय राइफल और 4 पैरा यूनिट के जवान शामिल थे।
सुबह 11:30 बजे के आसपास जब सैटेलाइट फोन का सिग्नल ट्रेस हुआ, तब एडवांस उपकरणों से आतंकियों की पुख्ता लोकेशन निकाली गई।

कौन-कौन थे आतंकी:

  • हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान (पाकिस्तानी, SSG का पूर्व कमांडो)

  • जिबरान (2024 सोनमर्ग सुरंग हमले में शामिल)

  • हमजा अफगानी

तीनों के पास से M4 कार्बाइन, AK-47, ग्रेनेड, और अन्य खतरनाक हथियार बरामद हुए।                         

              ऑपरेशन महादेव: श्रीनगर मुठभेड़ में हाशिम मूसा ढेर | Terrorist Encounter Image                      खुफिया जानकारी से शुरू हुई थी तैयारी:

एक हफ्ते पहले दाचीगाम जंगल में आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी मिली थी। साथ ही, आतंकियों ने चाइनीज अल्ट्रा कम्युनिकेशन सेट का फिर से इस्तेमाल किया था, जिससे उनका सैटेलाइट फोन एक्टिव हुआ और ट्रेसिंग से उनकी लोकेशन मिल गई।

पहलगाम हमला: जिसमें कांप गया था देश:

22 अप्रैल को बायसरन घाटी (पहलगाम के पास) में हुए हमले में 26 निर्दोषों की जान गई थी।
आतंकियों ने धार्मिक पहचान के आधार पर चुन-चुनकर हमला किया था। 16 लोग बुरी तरह घायल हुए थे।इसके बाद 24 अप्रैल को तीन आतंकियों के स्केच जारी किए गए — आदिल हुसैन ठोकर, हाशिम मूसा, और अली उर्फ तल्हा भाई। मूसा और अली पाकिस्तानी थे।

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कैसे चला ऑपरेशन महादेव? जानिए पूरे मिशन की रणनीति

जैसे ही आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी सुरक्षाबलों को मिली, सेना ने सोची-समझी रणनीति के साथ मोर्चा संभाला। श्रीनगर के पास दाचीगाम के घने जंगलों और ऊंचाई वाले इलाकों में छिपे आतंकियों को पकड़ना आसान नहीं था।

भारतीय सेना की दो अलग-अलग राष्ट्रीय राइफल यूनिट्स के साथ-साथ स्पेशल फोर्स कमांडो की टुकड़ियों ने चारों ओर से घेराबंदी की। यह सुनिश्च‍ित किया गया कि ऑपरेशन के दौरान आम नागरिकों को किसी तरह का खतरा ना हो, और जवानों की सुरक्षा भी बनी रहे। पूरी प्लानिंग एक चक्रव्यूह की तरह की गई।

इस ऑपरेशन को ‘महादेव’ नाम देने के पीछे भी एक खास वजह थी। मुठभेड़ सोमवार के दिन हुई और यह स्थान श्रीनगर के बेहद नज़दीक है — ऐसे में नाम भी प्रतीकात्मक रखा गया।

घटना स्थल के आसपास मौजूद शालीमार बाग, निषाद गार्डन और हरमन जैसे पर्यटन स्थलों को ध्यान में रखते हुए, सेना ने पूरे ऑपरेशन को बेहद सतर्कता और संयम के साथ अंजाम दिया

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एक साथ हुए फाइनल अटैक में ढेर हुए आतंकी

सुरक्षाबलों ने जैसे ही आतंकियों की ठोस लोकेशन ट्रेस की, उन्हें चारों तरफ से घेरकर एकसाथ फायरिंग की गई। तीनों आतंकियों को वहीं ढेर कर दिया गया।जंगल की घनघोरता और संभावित खतरे को देखते हुए सेना ने ऐसा इंतज़ाम किया कि न तो आतंकी भाग सकें और न ही कोई मददगार उनकी तरफ से फायरिंग कर पाए।

सेना के इस ऑपरेशन को जम्मू-कश्मीर पुलिस की एसओजी, सीआरपीएफ की दो यूनिट्स, और वैली क्विक एक्शन टीम का भी मजबूत साथ मिला।
पूरी कार्रवाई में हर यूनिट ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई और मिशन को सफलता के साथ पूरा किया गया

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प्रशासन की प्रतिक्रिया:

J&K के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि की और सेना को बधाई दी।
उन्होंने कहा, “पुलिस और सेना की तत्परता ने जम्मू-कश्मीर को एक बड़ा खतरा टालने में मदद की है।”

🚔 जांच और गिरफ्तारी:

हाल ही में एनआईए ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनकी जानकारी से ऑपरेशन को गति मिली।हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि गिरफ्तार आरोपियों ने इन्हीं तीन आतंकियों के नाम बताए या किसी और का।

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