भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : दुर्ग स्टेशन से हुई गिरफ्तारी से देश की संसद में मचा बवाल
छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर दो मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी के बाद आज संसद में हंगामे के आसार हैं। केरल की वंदना फ्रांसिस और प्रीति मेरी को पुलिस ने कथित धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोपों में जेल भेजा, जिससे देशभर में अल्पसंख्यक समुदाय में रोष है।
सांसदों ने जेल में जाकर की मुलाकात, बताया- साज़िश का शिकार हैं सिस्टर्स
मंगलवार को सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल दुर्ग जेल पहुंचा और दोनों कैथोलिक ननों से मुलाकात की। सांसद सप्तगिरि उल्का ने कहा, "हम सच्चाई जानने आए थे और अब यह मामला संसद में ज़रूर उठेगा।"
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बजरंग दल को बुलाकर बेवजह स्टेशन में बवाल करवाया और फिर झूठे केस में सिस्टर्स को फंसा दिया।
🗣️ वृंदा करात का आरोप- CM झूठ बोल रहे, असली दोषियों पर कार्रवाई नहीं
माकपा नेता वृंदा करात ने सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री को लॉ एंड ऑर्डर संभालना चाहिए, लेकिन वे उल्टा झूठ फैला रहे हैं। एक आदिवासी युवक को पीटा गया, लेकिन जेल भेजा गया निर्दोष ननों को।वृंदा करात ने कहा, "ये देश की आदिवासी महिलाओं की बेइज्जती है। ये दोनों महिलाएं एक नर्स और फार्मासिस्ट हैं।

भूपेश बघेल बोले- बीजेपी की है ये रणनीति, अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही |पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, "सांसद प्रतिनिधिमंडल जब जेल मिलने गया, तब उन्हें रोका गया। ये बीजेपी की अल्पसंख्यकों को कमजोर करने की चाल है।उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला साजिश के तहत रचा गया है और ननों को जबरन फंसाया गया।
सांसद बेनी बेहनन का बड़ा बयान- बजरंग दल का दबाव था, पुलिस ने कुछ नहीं किया
सांसद बेनी बेहनन ने खुलासा किया कि दोनों सिस्टर्स युवतियों को नौकरी के लिए आगरा और शहडोल लेकर जा रही थीं। लेकिन बजरंग दल ने गलतफहमी पैदा कर धर्मांतरण और तस्करी के आरोप लगाए।उन्होंने साफ कहा, "पुलिस ने कुछ नहीं किया, बजरंग दल ने पूरी स्क्रिप्ट लिखी और पुलिस ने उसे आंख मूंदकर निभाया। क्या यही कानून-व्यवस्था है?
केंद्र सरकार पर सीधा निशाना, कहा- ये टारगेटिंग है अल्पसंख्यकों की
जेल के बाहर मीडिया से बात करते हुए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रही है। बिना किसी ठोस सबूत के गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।उन्होंने कहा, "सिस्टर्स निर्दोष हैं, ये सरकार की मनमानी कार्रवाई है। जांच से पहले ही उन्हें सजा दे दी गई।"
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प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन थे शामिल?
इस प्रतिनिधिमंडल में सांसद के. फ्रांसिस जॉर्ज, बेनी बेहनन, सप्तगिरी उल्का, एन. के. प्रेमचंद्रन, इंग्रिड मैकलोड, अनिल थॉमस, कांग्रेस की महासचिव जरिता लैतफलॉन्ग और सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर भी मौजूद थीं।
वृंदा करात का गुस्सा फूटा- आदिवासी महिलाओं का अपमान सहन नहीं करेंगे
वृंदा करात ने दो टूक कहा, "क्रिश्चियन और महिलाओं के साथ हो रहा ये अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन लोगों ने सार्वजनिक रूप से ननों की बेइज्जती की, क्या उन्हें संविधान का डर नहीं उन्होंने कहा, "यहां की भाजपा सरकार नौकरी नहीं दे पा रही, और जो महिलाएं रोजगार दिलाने जा रही थीं, उन्हें ही जेल भेज दिया गया।"
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