भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : पूजा में पूरी श्रद्धा के बावजूद भी एक छोटी सी गलती आपकी साधना को निष्फल कर सकती है।
हिंदू धर्म में ऐसी ही एक महत्वपूर्ण मान्यता है — पूजा के दौरान आपकी परछाई का पूजा सामग्री या देवता पर पड़ना। यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि ऊर्जा संतुलन से जुड़ा एक गहरा संकेत माना जाता है। शास्त्रों में कई ऐसी पूजा विधियाँ बताई गई हैं, जिनमें छाया पड़ने को पूजा में दोष माना गया है। 
किन पूजाओं में छाया मानी जाती है वर्जित?
🔹 शिवलिंग पूजा:
शिवपुराण के अनुसार, जब शिवलिंग पर जल अर्पण किया जाता है, तब उस पर आपकी छाया नहीं पड़नी चाहिए।
मान्यता है कि छाया शिवलिंग की पवित्र ऊर्जा को बाधित करती है।
🔹 सूर्य को अर्घ्य देते समय:
सूर्य देव को जल चढ़ाते वक्त ध्यान रखें कि आपकी छाया जल पात्र या सूर्य प्रतिबिंब पर न पड़े।
कहा गया है कि सूर्य प्रत्यक्ष देव हैं और उनकी उपासना में कोई भी अवरोध अशुभ होता है।
🔹 दीपक या दीपदान की पूजा:
अमावस्या, शनिवार या दीपावली की रात दीपदान करते समय यह विशेष ध्यान रखें कि आपकी छाया दीपक पर न पड़े। विश्वास है कि इससे दीप का प्रकाश कमजोर पड़ता है और ऊर्जा प्रवाह में रुकावट आती है।
🔹 तांत्रिक साधनाएं:
भैरव, काली, या चामुंडा जैसे देवों की गुप्त साधनाओं में छाया का पड़ना बेहद बड़ा दोष माना गया है। शास्त्र कहते हैं, ऐसी साधना में परछाई पड़ने से पूरा अनुष्ठान विफल हो सकता है।
🔹 तुलसी पूजन:
शाम के समय तुलसी माता को छूना या उन पर छाया डालना वर्जित माना गया है। लोक मान्यता के अनुसार, तुलसी माता की पूजा में भी परछाई अशुभ मानी जाती है।
परछाई क्यों मानी जाती है अशुभ?
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जब पूजा करते समय आपकी परछाई —
आरती की थाली, दीपक, जल पात्र, हवन कुंड या भगवान की मूर्ति पर पड़ती है,
तो वह एक ऊर्जात्मक अवरोध पैदा करती है। यह अवरोध आपकी मानसिक ऊर्जा और समर्पण की कमी का भी संकेत होता है। यह माना जाता है कि परछाई उस ऊर्जा क्षेत्र को असंतुलित कर देती है, जो पूजा में फल देने के लिए जरूरी होता है।
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इन विशेष पूजाओं में विशेष सावधानी रखें:
🔸 संध्या पूजा
🔸 पूर्णिमा व्रत
🔸 हनुमान, शिव और शनिदेव की आराधना
🔸 हवन या अग्नि पूजा में तो परछाई बिल्कुल नहीं पड़नी चाहिए
स्थानीय संतों और गुरुजनों का भी कहना है कि यह चेतावनी स्वरूप होता है — कि साधक का मन पूजा में पूरी तरह एकाग्र नहीं है।
पूजा में परछाई से कैसे बचें?
– पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि प्रकाश स्रोत आपकी पीठ के पीछे न हो
– पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करें
– बैठने का स्थान और प्रकाश का संयोजन ऐसा रखें कि छाया सामने न जाए
– मानसिक रूप से पूरी जागरूकता और समर्पण के साथ पूजा करें
👉 धार्मिक नियमों की समझ ही सच्ची भक्ति को सार्थक बनाती है।
अगर आप भी इस तरह की उपयोगी और पवित्र जानकारियों से जुड़ना चाहते हैं, तो हमारे साथ बने रहिए।आपकी श्रद्धा और जागरूकता ही पूजा को फलदायक बना सकती है।
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