100 साल बाद इस बार राखी पर नहीं होगा भद्रा का साया, बहनें पूरे दिन अपने भाई को बांध सकेंगी राखी ! जानें कौन है भद्रा और क्यों मानी जाती है अशुभ?

 


भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : 100 साल बाद रक्षाबंधन का पर्व इस बार बेहद खास होगा, क्योंकि भद्रा का साया नहीं रहेगा। बहनें पूरे दिन अपने भाई को राखी बांध सकेंगी।

छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में इस बार रक्षाबंधन 9 अगस्त को मनाया जाएगा।
🔸 पंडित शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त दोपहर 2.12 बजे से 9 अगस्त दोपहर 1.24 बजे तक रहेगी, जबकि भद्रा काल 8 अगस्त रात 1.49 बजे तक ही खत्म हो जाएगा।इसका मतलब है कि 9 अगस्त को पूरे दिन बहनें बिना किसी ज्योतिषीय बाधा के राखी बाँध सकेंगी।

🌟 क्या होता है नवपंचम योग?

ज्योतिषाचार्य विनायक त्रिवेदी बताते हैं कि इस बार नवपंचम योग का भी संयोग बन रहा है, जो रक्षाबंधन को और अधिक शुभ बनाता है।इस योग में जब दो ग्रह—नवम और पंचम भाव में 120 डिग्री के कोण पर होते हैं, तब यह शुभ फल देता है।

🔸 इस बार सूर्य-बुध कर्क राशि में, गुरु-शुक्र मिथुन में, मंगल कन्या में और चंद्रमा मकर राशि में होगा।

🔹 श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो इसे और विशेष बनाता है।                                                            भाई की कलाई पर राखी बांधती बहन, भद्रा रहित रक्षाबंधन 2025

कौन है भद्रा? क्यों मानी जाती है अशुभ?

भद्रा कोई साधारण ग्रह या काल नहीं है, बल्कि एक पौराणिक पात्र भी है, जो सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया की संतान और शनि देव की बहन मानी जाती है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार:
🔸 भद्रा का जन्म असुरों के वध के लिए हुआ था।
🔸 उनका शरीर काला, दाँत बड़े और बाल लंबे होते हैं।
🔸 बचपन से ही वह हवन, यज्ञ जैसे मांगलिक कार्यों में बाधा पहुँचाने लगीं।
🔸 उनकी उथल-पुथल की प्रवृत्ति ने उन्हें “विघ्न लाने वाली” बना दिया।

💬 ब्रह्म देव ने तय किया भद्रा का समय

भद्रा के कारण परेशान लोगों के लिए सूर्य देव ब्रह्मा के पास गए।
ब्रह्मा जी ने तय किया कि भद्रा पृथ्वी, पाताल और स्वर्ग तीनों लोकों में घूमेगी, लेकिन एक निश्चित समय में ही उसका असर होगा।
🔸 उसी को “भद्रा काल” कहा जाता है, जो पंचांग में विष्टि करण के समय आता है।

📌 भद्रा की मौजूदगी में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी, मुंडन, या राखी बांधना वर्जित होता है।

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🙏 इस बार क्यों नहीं है डर?

तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन भद्रा भूलोक (पृथ्वी लोक) में नहीं होगी।
🔸 इस कारण कोई बाधा नहीं आएगी और राखी पूरे दिन बांधी जा सकेगी।
🔹 साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 2.24 बजे तक रहेगा, जो इसे और भी शुभ बनाता है।

तो इस बार की राखी को बनाएं और भी खास — बिना किसी विघ्न, बिना किसी बाधा।

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