निगम आयुक्त राजीव पांडेय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक अब हर वार्ड की जिम्मेदारी एक तय अधिकारी के पास रहेगी। इससे वार्डों की समस्याओं का समाधान तेजी से और जिम्मेदारी के साथ किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नई व्यवस्था के तहत अधिकारी रोज सुबह 6 बजे से 8 बजे तक अपने-अपने वार्डों का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे सफाई व्यवस्था, पेयजल, नाली, स्ट्रीट लाइट और कचरा उठाव जैसी मूलभूत सुविधाओं पर नजर रखेंगे। साथ ही मौके पर ही संबंधित कर्मचारियों को जरूरी निर्देश भी देंगे।
अब तक शहर में कई बार यह शिकायत सामने आती रही कि समस्याओं की जिम्मेदारी तय नहीं होने के कारण कई काम लंबे समय तक अटके रहते थे। कहीं गंदगी, कहीं टूटी सड़क, कहीं पानी की परेशानी तो कहीं खराब स्ट्रीट लाइट को लेकर लोग लगातार शिकायत करते थे।
गली-मोहल्लों के अंधेरे रास्तों और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर जनप्रतिनिधियों और आम लोगों में नाराजगी भी देखने को मिलती थी। लेकिन जवाबदेही साफ नहीं होने की वजह से समय पर समाधान नहीं हो पाता था।
अब माना जा रहा है कि हर वार्ड के लिए अलग अधिकारी तय होने से सीधे जवाबदेही तय होगी और लोगों की समस्याओं का जल्द निराकरण हो सकेगा।
नगर निगम ने वार्डों की जिम्मेदारी अलग-अलग अधिकारियों और कर्मचारियों को सौंपी है। वार्ड-1 जुनवानी, जहां करीब दो साल से पार्षद नहीं है, वहां की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता अजीत तिग्गा को दी गई है। वहीं वार्ड-2 के लिए दिनेश कोसरिया, वार्ड-3 के लिए संजय अग्रवाल, वार्ड-4 के लिए फत्तेलाल साहू, वार्ड-5 के लिए पुरुषोत्तम सिन्हा, वार्ड-6 के लिए चंदन निर्मल, वार्ड-7 के लिए रीमा हुमने और वार्ड-8 के लिए अंकित सक्सेना को जिम्मेदारी सौंपी गई है।इसी तरह सभी वार्डों के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है।
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ऑफिस से लौटते हुए राहुल ने जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला,
उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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