पुलिस के अनुसार, लोहा फ्लू डस्ट ले जाने वाली गाड़ियों में छिपाकर बाहर भेजा जाता था ताकि किसी को संदेह न हो। मामले में इससे पहले चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब तक कुल पांच आरोपी पकड़े जा चुके हैं, जबकि अन्य सदस्यों और मुख्य आरोपी की तलाश जारी है।
इस पूरे मामले का खुलासा 26 मई को हुआ था। पुलिस ने हथखोज स्थित एके ट्रेडर्स स्क्रैप यार्ड में दबिश दी थी। जांच के दौरान कई वाहनों में फ्लू डस्ट के साथ बड़ी मात्रा में लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री भरी हुई मिली।
मौके पर खड़े हाईवा वाहन क्रमांक सीजी 04 क्यूटी 8797 में फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट और बीम पाए गए। वहीं ट्रक क्रमांक सीजी 10 आर 2004 में भी लोहे की प्लेट कटिंग मिली। एक अन्य हाईवा वाहन सीजी 08 एडब्ल्यू 1475 खाली खड़ा मिला, जिसके बारे में बताया गया कि वह अपना माल पहले ही उतार चुका था।
पुलिस को फ्लू डस्ट के ढेर के बीच बड़ी मात्रा में लौह स्क्रैप भी मिला। जांच के दौरान वहां मौजूद ट्रक, टाटा वाहन, जेसीबी, हाईड्रा, चेन माउंटिंग मशीन समेत अन्य उपकरण भी जब्त किए गए।
पुलिस का कहना है कि इन मशीनों का इस्तेमाल लौह स्क्रैप को लोड कर अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान करीब 250 टन लौह स्क्रैप जब्त किया गया, जिसकी कीमत लगभग 90 लाख रुपये आंकी गई है।
वहीं जब्त किए गए वाहनों और मशीनों सहित कुल संपत्ति का मूल्य करीब 3 करोड़ 22 लाख रुपये बताया गया है।
पूछताछ में रविंद्र साहू ने स्वीकार किया कि वह संजय सिंह के निर्देश पर मैग्नेटिक क्रेन से बीएसपी का लोहा फ्लू डस्ट वाले वाहनों में लोड करता था। पुलिस का दावा है कि आरोपी पिछले चार से पांच महीनों से संगठित तरीके से इस काम को अंजाम दे रहे थे।
गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। वहीं फरार आरोपियों और मुख्य आरोपी संजय सिंह की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
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ऑफिस से लौटते हुए राहुल ने जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला,
उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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