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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: खतरनाक आवारा कुत्तों को मौ-त का इंजेक्शन दे! अफसरों को सख्त चेतावनी! डॉग लवर्स की याचिकाएं खारिज..

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के खौफ के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि लोगों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और खतरनाक या रेबीज संक्रमित आवारा कुत्तों पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे कुत्तों को मौ-त का इंजेक्शन देकर मा-रा भी जा सकता है।

मंगलवार को आए अंतिम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश के खिलाफ दाखिल सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि लोगों को सुरक्षित और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है, जिसमें कुत्तों के खतरे से मुक्त वातावरण भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, खतरनाक आवारा कुत्तों पर सख्ती बढ़ी

अदालत ने नवंबर 2025 में जारी निर्देशों को ही लागू रखने की बात कही। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी कि जो अधिकारी इन आदेशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और हाईवे जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि कुत्तों को पकड़ने के बाद नसबंदी और टीकाकरण कर दोबारा उसी जगह न छोड़ा जाए, बल्कि उन्हें शेल्टर होम में रखा जाए। सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाई गई थी।

इन निर्देशों के खिलाफ कई डॉग लवर्स और NGO की ओर से याचिकाएं दाखिल की गई थीं, लेकिन कोर्ट ने सभी को खारिज कर दिया।

सुप्रीम Court ने अपने आदेश में 8 अहम निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने राज्य सरकारों को पशु कल्याण बोर्ड के नियम मजबूत करने को कहा। हर जिले में पूरी तरह काम करने वाला ABC सेंटर बनाने और जरूरत के हिसाब से उनकी संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दूसरे स्थानों पर भी ये नियम लागू किए जाएं। साथ ही एंटी-रेबीज दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया।

NHAI को भी हाईवे पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने और उसकी मॉनिटरिंग करने के निर्देश मिले हैं। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि बेहद खतरनाक और रेबीज संक्रमित कुत्तों के मामले में कानून के तहत दया मृत्यु जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

अदालत ने आदेश लागू करने वाले नगर निगम और सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा देने की बात भी कही, ताकि उनके खिलाफ सामान्य रूप से FIR या सख्त कार्रवाई न हो।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग राज्यों में सामने आए डॉग बाइट मामलों का भी जिक्र किया। राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने में 1084 लोगों को कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आईं। कई छोटे बच्चों के चेहरे तक गंभीर रूप से जख्मी हुए।

तमिलनाडु में साल के पहले चार महीनों में करीब 2 लाख डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए। वहीं सूरत में एक जर्मन यात्री के साथ भी कुत्ते के काटने की घटना सामने आई।

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