रायपुर में मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक व्यवस्था को जनकेंद्रित बनाने पर जोर देते हुए कहा कि मुख्यालय से लेकर फील्ड तक अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं। ऐसे में उनका आचरण ही सरकार की छवि तय करता है।
उन्होंने साफ कहा कि लोगों की बात सुनना हर अधिकारी का पहला कर्तव्य है। जनता जब अपनी समस्या लेकर आए, तो उसे गंभीरता से सुना जाए और समाधान की दिशा में काम किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि संवाद तभी सार्थक होता है, जब उसमें संवेदना और समाधान की नीयत हो।
मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण को आसान, प्रभावी और भरोसेमंद बनाया जाए। जब कोई आम नागरिक किसी सरकारी दफ्तर पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार हो रहा है।
उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी अनुभव से तय होती है। इसलिए अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें, लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी जरूरतों के अनुसार काम करें। संवेदनशीलता और तत्परता को उन्होंने प्रशासन की असली ताकत बताया।
मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता और जवाबदेही को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ व्यवहार में विनम्रता जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि सुशासन सिर्फ नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। अगर अधिकारी सरल और सहयोगात्मक रवैया अपनाते हैं और समस्याओं का त्वरित समाधान करते हैं, तो शिकायतें अपने आप कम होने लगती हैं।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से अपील की कि वे हर नागरिक को यह अहसास दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है। तभी विकसित छत्तीसगढ़ का सपना साकार हो सकेगा।
सुशासन तिहार 2026 के दौरान मुख्यमंत्री खुद भी विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न केवल कामकाज, बल्कि अधिकारियों के व्यवहार को भी परखेंगे।
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ऑफिस से लौटते हुए राहुल ने जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला,
उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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