मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रत्यक्ष साक्ष्यों की कमी और जांच में प्रक्रियागत खामियों की वजह से आरोप साबित नहीं हो सके।
हमले के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू की थी। अलग-अलग इनपुट और पूछताछ के आधार पर 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश, दंगा, डकैती समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ था।
मामले की चार्जशीट कोंटा की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अदालत में पेश की गई। बाद में केस दंतेवाड़ा सेशन कोर्ट पहुंचा। अभियोजन पक्ष का दावा था कि गिरफ्तार आरोपी नक्सली संगठन से जुड़े थे और हमले में उनकी भूमिका थी।
हालांकि सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अदालत में अपने दावे मजबूत तरीके से साबित नहीं कर पाया। दंतेवाड़ा के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 7 जनवरी 2013 को सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि आरोपियों के खिलाफ संदेह से परे कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए गए।
बरी किए गए आरोपियों में से 2 की बाद में मौ@त हो चुकी है। ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार 2014 में हाईकोर्ट पहुंची। सरकार की ओर से महाधिवक्ता विवेक शर्मा और उप महाधिवक्ता सौरभ पांडे ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने महत्वपूर्ण साक्ष्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि इतने बड़े मामले में अदालत के सामने ऐसा कोई भरोसेमंद और कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे आरोपियों का दोष साबित हो सके। कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट का फैसला तर्कहीन नहीं था, इसलिए उसमें दखल देने का आधार नहीं बनता।
ताड़मेटला हमले का मास्टरमाइंड कुख्यात नक्सली कमांडर मड़ावी हिड़मा को माना जाता रहा है। बस्तर में कई बड़े नक्सली हमलों और खू@नी वारदातों में उसका नाम सामने आता रहा। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसके खिलाफ दो दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज थे।
आसिरगुड़ा, चिंतागुफा, कासलपाड़, बुरकापाल, मिनपा, टेकलगुड़म और पिडमेल जैसे इलाकों में हुए कई बड़े हमलों में भी हिड़मा का नाम सामने आया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक एर्राबोर इलाके के कई जनसंहारों में भी उसके दस्ते की भूमिका रही।
सुरक्षा एजेंसियां ताड़मेटला हमले का मुख्य सूत्रधार हिड़मा को ही मानती थीं। लंबे समय तक मोस्ट वॉन्टेड रहे हिड़मा को आखिरकार 18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के मारेडूमिल्ली जंगलों में एक खुफिया ऑपरेशन के दौरान मा@र गिराया गया।
सुबह हुई इस मु@ठभेड़ में हिड़मा, उसकी पत्नी राजे और 4 अन्य नक्सली ढेर हुए। उनके पास से AK-47 समेत आधुनिक हथियार बरामद किए गए थे। हालांकि माओवादी संगठन ने इस कार्रवाई को फर्जी मु@ठभेड़ बताया था।
छत्तीसगढ़ और बस्तर के इस बड़े मामले में 16 साल बाद भी अदालत में किसी का दोष साबित नहीं हो पाना कई सवाल खड़े कर रहा है। शहीद जवानों के परिवार आज भी इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसी ही बड़ी और भरोसेमंद खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए।