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छत्तीसगढ़ी रैप इंडस्ट्री को बड़ा झटका! लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी रैपर और सिंगर एप्पी राजा का निधन,फैंस में शोक की लहर..

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ी संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपने चर्चित रैप गीत ‘टूरा भोको लोलो’ से लाखों दिलों में जगह बनाने वाले लोकप्रिय रैपर और सिंगर एप्पी राजा उर्फ चेतन चांडक का निधन हो गया है। उनके जाने की खबर सामने आते ही प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के बीच शोक की लहर फैल गई।

32 वर्षीय एप्पी राजा लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। रायपुर में उनका इलाज चल रहा था। बताया जा रहा है कि करीब छह महीने पहले उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

छत्तीसगढ़ी रैपर एप्पी राजा का निधन

उस समय उनके दोस्तों ने जानकारी दी थी कि एक ऑपरेशन के बाद उनके शरीर में खून की कमी हो गई थी। लगातार हीमोग्लोबिन गिरने की वजह से उन्हें कमजोरी, चक्कर और सांस लेने में परेशानी की शिकायत थी। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी था और उन्हें रक्त भी चढ़ाया जा रहा था।

भानुप्रतापपुर से शुरू हुआ सफर

बस्तर संभाग के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर के रहने वाले एप्पी राजा ने अपने दम पर छत्तीसगढ़ी रैप को नई पहचान दिलाई। कम उम्र से ही रैप गीत लिखने वाले एप्पी ने आर्थिक संघर्षों के बीच अपना मुकाम हासिल किया।

परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें कुछ समय के लिए गुजरात के सूरत में नौकरी भी करनी पड़ी। हालांकि संगीत के प्रति उनका जुनून उन्हें फिर इसी क्षेत्र में वापस ले आया और उन्होंने अपने सपनों को नई उड़ान दी।

‘टूरा भोको लोलो’ से मिली बड़ी पहचान

एप्पी राजा को सबसे ज्यादा पहचान उनके चर्चित रैप सॉन्ग ‘टूरा भोको लोलो’ से मिली। गीत रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बन गया।

इसके बाद उन्होंने लगातार छत्तीसगढ़ी संगीत प्रेमियों को नए-नए गीत दिए। उनके चर्चित गीतों में ‘आ जा रे टुरी तोला रसगुल्ला खवाहु’, ‘छत्तीसगढ़ एंथम’ और ‘चो चो हस’ शामिल हैं।

उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और शहीद भगत सिंह पर भी रैप गीत तैयार किए थे, जिन्हें लोगों ने खूब पसंद किया।

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सोशल मीडिया पर भी थी मजबूत पहचान

एप्पी राजा सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय थे। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब 1.98 लाख फॉलोअर्स थे। वहीं उनके यूट्यूब चैनल से 5.95 लाख से अधिक सब्सक्राइबर जुड़े हुए थे।

उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके यूट्यूब चैनल को अब तक 13 करोड़ 24 लाख से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। उनके गीतों को प्रदेश ही नहीं बल्कि देश-विदेश में रहने वाले छत्तीसगढ़ियों ने भी खूब पसंद किया।

पंजाब से मिला करियर का बड़ा मौका

साल 2015 में पंजाब की एक म्यूजिक कंपनी ने उनका रैप सुनकर उन्हें रिकॉर्डिंग का मौका दिया था। यहीं से उनके करियर को नई दिशा मिली और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

संघर्ष और मेहनत के दम पर एप्पी राजा ने खुद को छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित रैप कलाकारों में शामिल किया।

दिलचस्प रही एप्पी राजा की जीवन यात्रा

नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के एक छोटे से कस्बे में रहने वाले एप्पी राजा का असली नाम चेतन चांडक था। वे 13-14 साल की उम्र से ही रैप गीत लिख रहे थे।

कई मुश्किलों से गुजरते हुए उन्होंने ‘टूरा भोको लोलो’ गीत कुछ साल पहले लिखा था, लेकिन उस समय उनके पास इसे रिकॉर्ड करने के लिए पर्याप्त पैसे और संसाधन नहीं थे।

साल 2015 में उन्हें पंजाब के लुधियाना स्थित एक म्यूजिक कंपनी का मेल मिला, जिसमें उनसे रैप रिकॉर्ड कर भेजने को कहा गया। कंपनी को उनका रैप पसंद आया और उन्हें पंजाब बुलाया गया।

वहीं उन्होंने अपना गीत रिकॉर्ड किया और यूट्यूब पर रिलीज किया। रिलीज होते ही गीत को शानदार प्रतिक्रिया मिली और लोग इसे सोशल मीडिया पर साझा करने लगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गीत को शुरुआती दो महीनों में करीब 7 लाख लोगों ने यूट्यूब, फेसबुक और व्हाट्सऐप पर सुना था।

एप्पी राजा को साल 2014 में MH-1 चैनल की ओर से भी गाने का ऑफर मिला था, जब उन्होंने अपना पहला रैप सॉन्ग ‘डी-टू-बी’ गाया था।

उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम पर ‘ट्रिब्यूट टू डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम’, सरदार भगत सिंह पर ‘सच्चा वीर’ और स्वतंत्रता दिवस पर भी रैप गीत तैयार किए थे।

जब एप्पी 11वीं कक्षा में थे, तब उनके पिता को हार्ट अटैक आया और वे बीमार रहने लगे। घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर उनकी मां ने सिलाई का काम शुरू किया।

परिवार की मदद के लिए एप्पी गुजरात के सूरत चले गए, जहां वे कपड़ों की एक दुकान में काम करते थे। वहां उन्हें 3 से 4 हजार रुपए तक वेतन मिलता था।

कुछ समय बाद उनका मन नहीं लगा और वे वापस लौट आए। माता-पिता के सहयोग से वे वर्ष 2015 में करियर की तलाश में पंजाब पहुंचे।

वहां उनकी मुलाकात पंजाब के सिंगर अक्स से हुई, जिन्होंने उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी।

उनके गुरु और पंजाबी फिल्मों के म्यूजिक डायरेक्टर सरजीत शानू ने उन्हें अपने स्टूडियो में रहने की जगह दी। मौका मिलने पर एप्पी पूरी रात स्टूडियो में मेहनत करते, गाने तैयार करते और उनकी म्यूजिक कंपोजिशन पर काम करते थे।

आज एप्पी राजा भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत और उनकी संघर्षभरी कहानी हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी। छत्तीसगढ़ और अपने पसंदीदा कलाकारों से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

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