पीड़ित बच्चियों की मां का आरोप है कि शिकायत मिलने के बाद भी पुलिस ने तत्काल कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि आरोपी को पकड़ने की बजाय पुलिस उसकी मां से बातचीत करती रही। परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी में भी देरी की गई, जिसके बाद परिजनों ने विरोध जताया।
पीड़ित पक्ष ने पुलिस पर लापरवाही बरतने, सबूत नहीं जुटाने, एफआईआर दर्ज करने में देरी करने, आरोपी पक्ष को विशेष सुविधा देने और समझौते का दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए हैं। इस संबंध में परिवार ने बिलासपुर एसएसपी से शिकायत की, जिसके बाद एएसआई शीतला प्रसाद त्रिपाठी को बिलासपुर लाइन अटैच किया गया।
परिजनों के मुताबिक आरोपी किशोर कई दिनों से चॉकलेट देने का लालच देकर बच्चियों के साथ गलत हरकत कर रहा था। 27 मई को परिजनों ने उसे कथित तौर पर रंगे हाथ पकड़ लिया था। उनका दावा है कि घटना के दौरान बच्चियों को रस्सी से बांधकर रखा जाता था। 29 मई को आरोपी को हिरासत में लिया गया, लेकिन मौके से जरूरी सबूत जब्त नहीं किए गए।
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परिवार का कहना है कि घटना से जुड़े सामान और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों की जानकारी पुलिस को तत्काल दी गई थी। इसके बावजूद उन्हें सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए, जिससे महत्वपूर्ण साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना की सूचना देने के बाद भी सिरगिट्टी पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज नहीं की। परिवार सुबह से देर रात तक थाने और अधिकारियों के चक्कर लगाता रहा। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज किया गया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि बच्चियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया था, जिसमें उन्हें तकलीफ होने की बात सामने आई। इसके बावजूद मामले को कमजोर करने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि बच्चियों से बार-बार पूछताछ कर उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
पीड़ित बच्चियों की मां का आरोप है कि थाना प्रभारी और जांच अधिकारी निष्पक्ष जांच करने के बजाय समझौते का दबाव बना रहे थे। परिवार का दावा है कि उन्हें मामले को यहीं खत्म करने की सलाह दी जा रही थी।
शिकायत के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने एएसआई शीतला प्रसाद त्रिपाठी को लाइन अटैच कर दिया है। वहीं डीएसपी अनिता प्रभा मिंज के अवकाश पर होने के कारण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रश्मित कौर चावला को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पीड़ित पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी की मां को थाने में विशेष सुविधाएं दी जा रही थीं। उनका कहना है कि जहां एक ओर पीड़ित परिवार को घंटों इंतजार कराया गया, वहीं आरोपी पक्ष के साथ अलग व्यवहार किया जा रहा था। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं, जिससे बच्चियां और परिजन डरे हुए हैं।
पीड़ित परिवार ने सात प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें किसी वरिष्ठ और स्वतंत्र अधिकारी से जांच कराने, घटना से जुड़े सभी सामान जब्त करने, एफआईआर और जांच में हुई कथित लापरवाही की जांच, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा, जांच पूरी होने तक उन्हें केस से दूर रखने, परिवार को सुरक्षा देने और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग शामिल है।
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ऑफिस से लौटते हुए राहुल ने जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला,
उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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