पेट्रोलियम मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण खनूजा ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतों में करीब 46 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से सब्सिडी व्यवस्था में यह बदलाव किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के चलते घरेलू LPG सिलेंडर की वास्तविक लागत ₹1600 से अधिक हो गई है। इसके कारण तेल कंपनियों को प्रति सिलेंडर करीब ₹700 की अंडर रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू LPG पर कुल अंडर रिकवरी बढ़कर ₹60,000 करोड़ तक पहुंच गई, जबकि इससे पहले यह आंकड़ा ₹41,338 करोड़ था। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को ₹30,000 करोड़ के मुआवजे की मंजूरी दी है। ग्राहकों को मिलने वाली सब्सिडी इस राहत राशि से अलग है।
ब्रीफिंग के दौरान यह भी बताया गया कि LPG के अलावा तेल कंपनियां डीजल पर ₹30 प्रति लीटर और पेट्रोल पर ₹6 प्रति लीटर तक का नुकसान झेल रही हैं। इसके चलते कंपनियों को प्रतिदिन लगभग ₹600 से ₹700 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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भारत अपनी कुल LPG जरूरत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इसकी लागत सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) के आधार पर तय होती है, जिसे सऊदी अरामको हर महीने निर्धारित करती है। पश्चिम एशिया में फरवरी के अंत में होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।
फरवरी में LPG का सऊदी सीपी बेंचमार्क लगभग 543 डॉलर प्रति टन था, जो जून में बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गया। यानी संकट शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क में करीब 46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी दौरान प्रोपेन 39 फीसदी और ब्यूटेन 52 फीसदी तक महंगी हुई है।
सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत कई देशों की तुलना में कम बनी हुई है। पड़ोसी देशों के साथ-साथ अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भी भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ती कुकिंग गैस उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार के अनुसार बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लागत का बड़ा हिस्सा फिलहाल खुद वहन किया जा रहा है, ताकि इसका पूरा बोझ आम उपभोक्ताओं पर न पड़े।
दुनिया के करीब एक-तिहाई तेल और भारत की 54 प्रतिशत LPG का आयात होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होता है। संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हुईं, लेकिन भारत ने अपने जहाजों की आवाजाही जारी रखी। भारतीय टैंकर लगातार कच्चे तेल और LPG की खेप लेकर देश के बंदरगाहों तक पहुंचे, जिससे किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं हुई।
सप्लाई को बनाए रखने के लिए भारत ने घरेलू LPG उत्पादन को 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ाते हुए लगभग 32 टीएमटी से 52 टीएमटी तक पहुंचा दिया। साथ ही अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी गैस की खरीद शुरू की गई।
उपलब्ध गैस की आपूर्ति में घरों के साथ अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे प्राथमिक उपयोगकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई। वहीं मांग का दबाव कम करने के लिए लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
घरेलू गैस की व्यावसायिक बाजार में होने वाली चोरी रोकने के लिए ओटीपी आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन व्यवस्था को बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक कर दिया गया है।
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ऑफिस से लौटते हुए राहुल ने जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला,
उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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