भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : शोर सिर्फ कानों को नहीं, बल्कि दिल और दिमाग को भी घायल कर रहा है — अब हाईकोर्ट ने इस खतरे को गंभीरता से लिया है और सरकार को सख्त निर्देश पढ़ा दिए हैं।
– विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) शोर प्रदूषण को ‘साइलेंट किलर’ कहता है, क्योंकि यह धीरे-धीरे और बिना चेतावनी के हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। सीधे-सीधे यह सिर्फ कानों को नहीं, बल्कि दिल, दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाता है।
रोज़मर्रा के तेज़ शोर से 10-15% तक लोग सुनने की क्षमता खो रहे हैं। ये केवल बुजुर्ग नहीं, बल्कि युवा और बच्चे भी हो सकते हैं— कारण चाहे लाउड ईयरफोन हो, शादी‑ब्याह का डीजे, फैक्ट्री का शोर या ट्रैफिक—ये सभी कानों की संवेदनशील कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं, जो फिर कभी ठीक नहीं होतीं।
स्थानीय उदाहरण: पिछले साल बलरामपुर में डीजे की तेज़ धुन के चलते एक व्यक्ति को ब्रेन हेमरेज हुआ, जिसने इलाके में भय फैला दिया था।
– राजधानी के डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में रोज़ाना 15-20 लोग ऐसे लक्षण लेकर आते हैं जो शोर से जुड़े हैं—जैसे ब्लड प्रेशर की चढ़‑उतर, स्ट्रेस और ब्रेन रिलेटेड समस्याएँ। कार्डियोलॉजी और मेडिसिन विभाग में रोज़ाना 500 से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं, जिनमें कई का कारण शोर ही होता है।
– हाईकोर्ट ने अब सरकार को तीन सप्ताह में ‘कोलाहल नियंत्रण अधिनियम’ लागू करने का निर्देश दिया है। नए नियमों में 5 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान, डीजे‑लाउडस्पीकर पर पाबंदी और नियम उल्लांगन पर सख़्त कार्रवाई शामिल है।
– कान और दिल‑दिमाग पर शोर का असर कितना खतरनाक हो सकता है, यह जानने के लिए सुनिए:
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85 डेसिबल से ऊपर की आवाज़ कान को नुकसान पहुंचा सकती है।
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120 डेसिबल से कान में दर्द और असुविधा होती है, 140 डेसिबल तो बहरापन भी ला सकता है।
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65 डेसिबल से अधिक का शोर लंबे समय तक सुनने से ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का ख़तरा बढ़ जाता है।
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नींद बाधित होने से मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन जैसे लक्षण बढ़ते हैं।
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बच्चों में ध्यान केंद्रित करने में कमी और मानसिक विकास में बाधा भी शोर का असर हो सकता है।
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नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, डीजे की लेजर लाइट बच्चों की आंखों के लिए ख़तरनाक है और इससे अँधापन तक हो सकता है। पूर्व में हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि स्कूल, अस्पताल और कॉलेज के आसपास “साइलेंस जोन” घोषित किए जाएँ—लेकिन कुछ जगहों पर अभी तक यह लागू नहीं हुआ।
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