भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : अमेरिका से दूरी, लेकिन दुनिया से बढ़ती नज़दीकी... ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी ने भारत को दुनिया में नए दरवाज़े खोल दिए हैं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर भारी टैरिफ लगाकर सोचा था कि इससे भारत दबाव में आ जाएगा। लेकिन मामला उल्टा पड़ गया। टैरिफ के इस झटके के बाद भारत ने कूटनीतिक चाल चलते हुए चीन, कनाडा और अन्य देशों से नज़दीकियां बढ़ा लीं।
भारत के इस बदले रवैये से पूरब से लेकर पश्चिम तक उसके रिश्तों में सुधार हुआ है। लोगों में इस रणनीतिक बदलाव को लेकर काफी सकारात्मकता देखी जा रही है।
अमेरिका का वार, भारत की समझदारी
ट्रंप ने पहले 30 जुलाई को भारत पर 25% टैरिफ लगाया और फिर रूसी तेल खरीदने के नाम पर और 25% का अतिरिक्त शुल्क ठोक दिया। अब कुल मिलाकर 50% टैरिफ भारत को देना पड़ रहा है।
लेकिन इस दबाव से भारत झुका नहीं। बल्कि उसने यूके, जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, इटली समेत 40 देशों से कपड़ा निर्यात के लिए बातचीत शुरू कर दी है। यही नहीं, भारत खुद को एक भरोसेमंद सप्लायर के रूप में पेश करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
भारत-चीन के रिश्तों में नई गर्मजोशी
2018 के बाद पहली बार पीएम मोदी चीन के बीजिंग में आयोजित शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इसे लेकर इलाके के राजनैतिक विश्लेषक भी हैरान हैं।हाल ही में पीएम मोदी और चीनी विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं का सम्मान करने की बात कही।
कनाडा से भी रिश्ते हुए बेहतर
पिछले साल एक खालिस्तानी आतंकी की हत्या के बाद भारत-कनाडा रिश्तों में तनाव आ गया था। लेकिन अब दोनों देशों ने फिर से एक-दूसरे की राजधानी में राजदूतों की नियुक्ति कर दी है।भारत ने दिनेश के. पटनायक को कनाडा भेजा है, जबकि कनाडा ने क्रिस्टोफर कूटर को भारत में नियुक्त किया है।
40 देशों से संपर्क, 590 अरब डॉलर का बाज़ार टारगेट
भारत जिन 40 देशों से संपर्क कर रहा है, वे मिलकर लगभग 590 अरब डॉलर का कपड़ा और परिधान आयात करते हैं। ऐसे में भारत के पास अपनी मार्केट हिस्सेदारी बढ़ाने का शानदार मौका है।
इन देशों में टारगेटेड अप्रोच अपनाने की योजना है ताकि भारत की छवि एक क्वालिटी और टिकाऊ वस्त्र उत्पादक देश के रूप में स्थापित हो।
🇺🇸 ट्रंप को अमेरिका में ही मिला विरोध
भारत पर टैरिफ लगाने के ट्रंप के फैसले की आलोचना अमेरिका में भी शुरू हो गई है।
डेमोक्रेट सांसदों ने कहा कि ये फैसला भारत के साथ रिश्तों को नुकसान पहुंचाएगा।
माइक पेंस बोले, “अमेरिकी कंपनियों को भारी आर्थिक झटका लग सकता है।”
कर्ट कैंपबेल ने भारत को अमेरिका का सबसे अहम साथी बताया।
निक्की हेली ने चेताया कि यह चीन के खिलाफ अमेरिका की रणनीति को कमजोर करेगा।
जॉन बोल्टन ने इसे “कूटनीतिक भूल” करार दिया।
व्यापारियों का कहना है कि ऐसे फैसलों से भारत को दीर्घकालिक फायदा मिल सकता है।
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डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ चाल भारत के लिए नुकसान नहीं, बल्कि अवसर लेकर आई।जहां अमेरिका में विरोध की आवाज़ें तेज़ हो रही हैं, वहीं भारत धीरे-धीरे दुनिया में अपने लिए एक नई जगह बना रहा है।
आपका क्या सोचना है? क्या ट्रंप की ये रणनीति अमेरिका के लिए भारी साबित होगी? ऐसी रोचक खबरों के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।
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