भिलाई की पत्रिका न्यूज़ :भारत के ज्यादातर घरों में दिन की शुरुआत चाय या कॉफी से होती है। ‘टी बोर्ड ऑफ इंडिया’ के अनुसार देश के करीब 88 फीसदी घरों में चाय पी जाती है, जबकि ‘कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया’ के सर्वे में 84 फीसदी लोगों ने चाय-कॉफी को पसंदीदा ड्रिंक बताया है। लेकिन यही आदत जब छोटे बच्चों तक पहुंच जाती है, तो यह सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
कई घरों में छोटे बच्चों को भी चाय-कॉफी चखाई जाती है। माता-पिता अक्सर सोचते हैं कि कभी-कभार एक-दो घूंट से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह सोच गलत है। चाय-कॉफी सीधे तौर पर बच्चों की सेहत, व्यवहार और दिमागी विकास को प्रभावित करती है।
चाय-कॉफी में मौजूद कैफीन बच्चों पर बड़ों की तुलना में ज्यादा असर करता है। बच्चों का दिमाग और नर्वस सिस्टम अभी विकास की अवस्था में होता है। ऐसे में कैफीन उनकी नींद, भूख, एकाग्रता और व्यवहार को बिगाड़ सकता है। इसका असर तुरंत नजर न आए, लेकिन लंबे समय में यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
इस विषय पर जानकारी देते हुए डॉ. सनी लोहिया, कंसल्टेंट पीडियाट्रिक्स, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर बताते हैं कि चाय-कॉफी में कई नेचुरल केमिकल कंपाउंड होते हैं। चाय में कैफीन के साथ टैनिन और फ्लेवोनॉयड्स पाए जाते हैं, जबकि कॉफी में कैफीन, क्लोरोजेनिक एसिड और कुछ नेचुरल ऑयल्स होते हैं। बड़ों के लिए ये कुछ हद तक सुरक्षित हो सकते हैं, लेकिन बच्चों के लिए इनमें मौजूद कैफीन और टैनिन नुकसानदायक हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि नींद लाने के लिए दिमाग में एडेनोसिन नाम का केमिकल काम करता है। कैफीन इस केमिकल के रिसेप्टर्स को ब्लॉक कर देता है, जिससे नींद नहीं आती और दिमाग जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाता है। कुछ समय के लिए एनर्जी महसूस होती है, लेकिन असर खत्म होते ही थकान, बेचैनी और अनिद्रा जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
बच्चों में कैफीन का असर और भी तेज होता है। इससे उनकी नींद बाधित होती है, दिल की धड़कन बढ़ सकती है और चिड़चिड़ापन नजर आने लगता है। चाय-कॉफी में मौजूद चीनी भी बच्चों के लिए नुकसानदायक है। चीनी से ब्लड शुगर अचानक बढ़ता है, बच्चा जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाता है, लेकिन थोड़ी देर बाद शुगर लेवल गिरने से थकान, कमजोरी और मूड खराब होने लगता है। यह आदत आगे चलकर ओवरईटिंग और मोटापे की वजह बन सकती है।
कैफीन बच्चों की नींद पर गहरा असर डालता है। इससे मेलाटोनिन हॉर्मोन प्रभावित होता है, जिसके कारण बच्चे देर से सोते हैं, नींद बार-बार टूटती है या गहरी नींद नहीं आती। पर्याप्त नींद न मिलने से बच्चों में थकान, चिड़चिड़ापन, फोकस की कमी और सीखने की क्षमता में गिरावट देखी जाती है।
बच्चों में कैफीन के साइड इफेक्ट्स:
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डिहाइड्रेशन
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पेट दर्द / एसिडिटी
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चिड़चिड़ापन
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नींद न आना
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हार्टबीट तेज होना
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फोकस में कमी
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लत लगना
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थकान – सिरदर्द
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कमजोर याददाश्त
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पोषक तत्वों की कमी
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बेचैनी
डॉक्टरों के अनुसार कैफीन कैल्शियम के अवशोषण को भी प्रभावित करता है, जो हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है। साथ ही नींद की कमी बच्चों की ओवरऑल ग्रोथ को नेगेटिव तरीके से प्रभावित करती है। कुछ बच्चे, खासकर जिनको हार्ट या लंग्स से जुड़ी समस्याएं हों या जो ADD और ADHD की दवाएं लेते हों, उनके लिए कैफीन और भी ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है।
चाय-कॉफी के अलावा कई रेडीमेड फूड प्रोडक्ट्स, कुछ दवाओं और यहां तक कि च्यूइंग गम में भी कैफीन मौजूद हो सकता है। इसलिए बच्चों को कुछ भी देते समय फूड लेबल ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
डॉ. सनी लोहिया साफ कहते हैं कि बच्चों को चाय-कॉफी देने का कोई सुरक्षित तरीका नहीं है। चाहे चाय हल्की हो या उसमें ज्यादा दूध मिला हो, कैफीन बच्चों के ब्रेन और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। बच्चों की जिद पूरी करने की बजाय उन्हें दूध, छाछ, नारियल पानी, पानी या घर पर बने फ्रूट जूस और स्मूदी देना बेहतर विकल्प है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) के मुताबिक, 12 साल तक के बच्चों को कैफीन बिल्कुल नहीं देना चाहिए। बच्चों की सेहत से जुड़ी ऐसी जरूरी और भरोसेमंद खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें और इस जानकारी को हर माता-पिता तक जरूर पहुंचाएं।
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