अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से राहु-केतु के दोष या शनि की साढ़ेसाती से मानसिक और आर्थिक परेशानी झेल रहा है, तो होलिका की पवित्र अग्नि में काले तिल अर्पित करना वरदान जैसा माना गया है। ज्योतिष के अनुसार काले तिल का सीधा संबंध शनि देव और राहु से जोड़ा जाता है।
परिक्रमा के पीछे आस्था और विज्ञान
होलिका दहन के समय अग्नि की परिक्रमा केवल परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा एक विश्वास है। मान्यता है कि जलती होलिका से निकलने वाली तीव्र ऊर्जा शरीर के आंतरिक चक्रों को सक्रिय करती है।
‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जप करते हुए परिक्रमा करने से व्यक्ति के चारों ओर सुरक्षा कवच बनता है। यह राहु के भ्रम और शनि के प्रभाव को शांत करने में सहायक माना गया है।
कैसे करें यह सरल उपाय?
– हाथ में एक मुट्ठी काले तिल लें और अपनी बाधाएं दूर करने की प्रार्थना करें।
– तिलों को सिर के ऊपर से घड़ी की दिशा में सात बार घुमाएं।
– इसके बाद तिलों को होलिका की पवित्र अग्नि में अर्पित कर दें।
– अंत में 3, 5 या 7 बार परिक्रमा कर अग्नि देव को प्रणाम करें।
मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह छोटा सा उपाय जीवन की परेशानियों को कम कर सकता है।
Disclaimer :यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य आस्था और परंपराओं के अनुसार प्रस्तुत की गई है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है।
विज्ञापन
यह भी पढ़े -2026 में बिना पंचांग देखे शादी-गृह प्रवेश, जानिए साल की 7 सबसे शुभ तिथियां! हर मांगलिक कार्य होगा सिद्ध..
यह भी पढ़े - New Year 2026: सूर्य का साल रहेगा 2026, घर लाएं ये शुभ चीजें, बढ़ेगा मान-सम्मान और तरक्की.
यह भी पढ़े -सर्दियों में वर्कआउट बना सकता है दिल के लिए खतरा, ठंड में एक्सरसाइज से पहले जान लें ये जरूरी नियम..
भिलाई की पत्रिका न्यूज़ के whatsup ग्रुप से जुड़ने के लिए लिंक पर क्लिक कर ज्वाइन करे

.jpg)

