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8वीं की किताब में ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ पर हंगामा! सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद NCERT किताब की बिक्री पर रोक!

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। 8वीं कक्षा की NCERT किताब में शामिल ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब इस किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक, NCERT ने इस फैसले की पुष्टि की है। न्यूज एजेंसी ANI के हवाले से बताया गया कि किताब को वेबसाइट से हटा लिया गया है। वहीं PTI की रिपोर्ट के अनुसार, विवादित हिस्से को हटाने पर भी विचार किया जा रहा है।

NCERT की 8वीं कक्षा की किताब पर रोक

जानकारी के अनुसार, चैप्टर का सुझाव देने वाले एक्सपर्ट्स और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की इंटरनल मीटिंग बुलाई गई है। बुधवार को सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी ने यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया।

सिब्बल ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में करप्शन के बारे में पढ़ाया जा रहा है, जो निंदनीय है। सिंघवी ने यह भी कहा कि किताब में ऐसा दिखाया गया है जैसे अन्य संस्थानों में करप्शन है ही नहीं।

इस पर CJI सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश जैसा बताया और कहा कि वे खुद इस केस को हैंडल करेंगे।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगर करप्शन का मुद्दा शामिल करना था, तो शासन के तीनों अंग—कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका—को साथ में जोड़ा जाना चाहिए था। सूत्रों ने यह भी कहा कि फैक्ट्स के क्रॉस वेरिफिकेशन के लिए केंद्र से परामर्श नहीं लिया गया।

दरअसल, 23 फरवरी को NCERT ने 8वीं कक्षा के लिए सोशल साइंस की नई किताब जारी की थी, जो एकेडमिक सेशन 2026-27 से लागू होनी थी। किताब का नाम ‘Exploring Society: India and Beyond Part 2’ है। इसमें ‘The Role of the Judiciary in Our Society’ चैप्टर के अंदर ‘Corruption in the Judiciary’ विषय जोड़ा गया था।

किताब में पेंडिंग मामलों और जजों की कमी को प्रमुख चुनौतियों के रूप में बताया गया है। एक सेक्शन ‘Justice delayed is justice denied’ शीर्षक से है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और निचली अदालतों में लंबित मामलों के आंकड़े दिए गए हैं।

किताब में CPGRAMS सिस्टम, जजों की आचार संहिता और इंपीचमेंट प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई है। साथ ही यह भी उल्लेख है कि 2017 से 2021 के बीच 1,600 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई थीं।

इसमें पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने कहा था कि न्यायपालिका में गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर असर पड़ता है, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही से भरोसा फिर से मजबूत किया जा सकता है।

फिलहाल, CJI की टिप्पणी के बाद यह किताब NCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार 24 फरवरी से ऑफलाइन बिक्री भी रोक दी गई है, हालांकि इस पर NCERT की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

यह मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षा और न्यायपालिका से जुड़ा यह मुद्दा आगे क्या मोड़ लेता है, इसकी हर अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

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