बताया जा रहा है कि बंदर अब तक दो कुत्ते के पिल्लों को उठा चुका है। इस घटना के बाद कॉलोनी में डर का माहौल है और लोग अपने बच्चों को लेकर भी सतर्क हो गए हैं।
पिल्ले को बचाने के लिए गौरव ने करनाल की एनजीओ ‘रॉकस्टार फैमिली’ के संचालक पवन शर्मा से संपर्क किया। सूचना मिलते ही पवन शर्मा अपनी रेस्क्यू टीम, एंबुलेंस और जरूरी सामान के साथ पानीपत पहुंचे।
टीम ने देखा कि बंदर सरकारी कॉलोनी की एक छत पर पिल्ले को गोद में दबाए बैठा है। करीब 6 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। जैसे ही कोई पास आता, बंदर पिल्ले को लेकर दीवार, पेड़ या बिजली के खंभे पर चढ़ जाता।
आखिरकार टीम ने चालाकी से बंदर को खाने का लालच दिया। जैसे ही बंदर फल लेने के लिए झुका, टीम के सदस्य ने फुर्ती दिखाकर पिल्ले को छुड़ा लिया। इस दौरान बंदर ने आक्रामक होने की कोशिश की, लेकिन टीम ने सुरक्षा उपकरणों की मदद से स्थिति संभाल ली।
लोगों ने राहत की सांस ली ही थी कि अगले दिन बंदर ने एक और पिल्ले को उठा लिया। इस बार उसका व्यवहार ज्यादा खतरनाक बताया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बंदर पिल्ले को लेकर पानी की टंकी में कूद गया। कुछ पल के लिए लगा कि पिल्ला डूब जाएगा, लेकिन थोड़ी देर बाद बंदर उसे बाहर लेकर आ गया।
दोबारा सूचना मिलने पर रेस्क्यू टीम करनाल से पानीपत पहुंची। लेकिन इस बार बंदर और सतर्क था। उसने टीम और उनकी वर्दी को पहचान लिया था। जैसे ही टीम की गाड़ी नजर आती, वह पिल्ले को लेकर गायब हो जाता।
करीब 7 घंटे तक चले इस चूहे-बिल्ली जैसे घटनाक्रम में टीम को सफलता नहीं मिल सकी। बंदर एक हाथ से लोगों द्वारा फेंका गया खाना खाता रहा और दूसरे हाथ से पिल्ले को सीने से लगाए रखा।
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