धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जब नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार से होती है तो माता रानी डोली में सवार होकर आती हैं। इसे शास्त्रों में महामारी या संघर्ष जैसे संकेतों से जोड़ा गया है, जो समाज को सतर्क रहने का संदेश देता है। हालांकि इस बार माता का गमन हाथी पर होना बेहद शुभ माना जा रहा है। हाथी पर प्रस्थान अच्छी बारिश, बेहतर खेती, समृद्धि और आर्थिक खुशहाली का संकेत देता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे शुरू होगी। लेकिन सूर्योदय अमावस्या तिथि में होने के कारण शास्त्र सम्मत विधि से उसी दौरान घट स्थापना का विधान बनेगा। इस दिन शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि योग का त्रिवेणी संयोग भी बनेगा, जिसे बेहद शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस महासंयोग में की गई पूजा भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करती है।
कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन यानी 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो विशेष शुभ समय बताए गए हैं। पहला श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6:02 बजे से 8:40 बजे तक रहेगा। वहीं दूसरा शुभ समय सुबह 9:16 बजे से 10:56 बजे तक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन स्थिर लग्नों में घट स्थापना करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
नवरात्र पर सेवा पंडालों की तैयारी शुरू
हर साल की तरह इस बार भी दुर्ग के अंजोरा से लेकर डोंगरगढ़ तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सेवा पंडाल लगाए जाएंगे। मंदिर संस्था और सेवादारों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं जिला प्रशासन ने भी बैठक लेकर रूट और सेवा व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक तैयारी शुरू कर दी है।
यदि आप भी माता रानी के भक्त हैं तो इस पावन नवरात्र में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करें और इस खबर को अन्य श्रद्धालुओं तक जरूर पहुंचाएं।
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