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जानिए क्यों हिंदू धर्म में छोटे बच्चों का दाहसंस्कार नहीं किया जाता? गरुड़ पुराण में छिपा है दफनाने का रहस्य..

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : हिंदू धर्म की परंपराओं में एक ऐसा रहस्य छिपा है, जिसे जानकर हर कोई सोच में पड़ जाता है—आखिर छोटे बच्चों का दा+ह सं+स्कार क्यों नहीं किया जाता?

आम तौर पर हिंदू रीति-रिवाजों में मृ+त्यु के बाद अग्नि सं+स्कार को सबसे पवित्र माना जाता है। माना जाता है कि अग्नि शरीर को पंचतत्वों में मिलाकर आत्मा को मुक्त कर देती है। लेकिन जब बात छोटे बच्चों की होती है, तो यह परंपरा बदल जाती है।


बच्चों के अंतिम संस्कार की परंपरा – दफनाने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटे बच्चे पूरी तरह से निर्मल और निष्कपट होते हैं। उन्होंने अभी तक ऐसे कर्म नहीं किए होते, जिनसे उन्हें जन्म-मरण के बंधन में बंधना पड़े। उनकी आत्मा पहले से ही शुद्ध और मुक्त मानी जाती है, इसलिए उन्हें अग्नि से शुद्ध करने की आवश्यकता नहीं समझी जाती।

गरुड़ पुराण में भी इसका उल्लेख मिलता है। इसमें कहा गया है कि जिन बच्चों के दूध के दांत नहीं निकले हों या जो बहुत छोटी उम्र के हों, उनका दा+ह सं+स्कार नहीं किया जाता। कई परंपराओं में 2 से 5 साल तक के बच्चों को दफनाने की मान्यता बताई गई है। इस उम्र तक बच्चे में ‘मैं’ और ‘मेरा’ का भाव भी पूरी तरह विकसित नहीं होता न ही शरीर से उनका कोई मोह नहीं होता है|

आध्यात्मिक दृष्टि से माना जाता है कि मनुष्य के तीन शरीर होते हैं—स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर। बड़े व्यक्तियों में ये तीनों गहराई से जुड़े होते हैं, जिन्हें अलग करने के लिए अग्नि की जरूरत पड़ती है। लेकिन बच्चों में यह संबंध बहुत हल्का होता है, जिससे आत्मा आसानी से शरीर से अलग हो जाती है।

वैज्ञानिक नजरिए से भी बच्चों का शरीर बेहद कोमल होता है। उनके सिर का ऊपरी हिस्सा, जिसे ब्रह्मरंध्र कहा जाता है, पूरी तरह बंद नहीं होता। ऐसे में प्राण का निकलना सरल माना जाता है और कपाल क्रिया जैसी प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं पड़ती।

हिंदू धर्म में शरीर को पंचतत्व—मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना माना गया है। बड़े व्यक्ति को अग्नि के माध्यम से इन तत्वों में मिलाया जाता है, जबकि बच्चे को सीधे मिट्टी को सौंप देना अधिक स्वाभाविक और शांतिपूर्ण माना जाता है।

इसके पीछे एक भावनात्मक पहलू भी जुड़ा है। छोटे बच्चे की मृ+त्यु परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक होती है। ऐसे में दफनाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांत होती है और यह अहसास देती है कि बच्चा धरती मां की गोद में सुरक्षित है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं,ज्योतिष और सामान्य जानकारियों पर आधारित है.भिलाई की पत्रिका न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है| 

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