नई व्यवस्था के तहत, सभी स्कूलों में प्रार्थना सभा की शुरुआत राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत से होगी। इसके बाद दीप वंदना, सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र का पाठ किया जाएगा। यह नियम हर छात्र के लिए अनिवार्य रहेगा।
इन सभी मंत्रों को 16 जून से पहले स्कूलों तक पहुंचा दिया जाएगा। साथ ही, मंत्रों को स्कूल की दीवारों पर भी लिखवाने की तैयारी है, ताकि बच्चे आसानी से उन्हें पढ़ और समझ सकें। इसके अलावा, हर स्कूल में लाउडस्पीकर लगाने की योजना भी बनाई जा रही है।
स्कूलों में हर शनिवार को गतिविधि दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन बच्चों को बिना बस्ते के भी बुलाया जा सकता है और स्कूल में 6 अलग-अलग गतिविधियां कराने का निर्णय लिया गया है।
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का कहना है कि बच्चे देश का भविष्य हैं, इसलिए उनमें नैतिक मूल्यों का विकास जरूरी है। उनका मानना है कि मंत्रोच्चार से बच्चों के मन और मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा आती है और उनका बौद्धिक विकास होता है। विज्ञान भी इस बात को स्वीकार करता है कि इससे एकाग्रता बढ़ती है।
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