राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू हुए इस कानून में साफ किया गया है कि बल, लालच, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर धर्म परिवर्तन कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना देना होगा।
दोबारा ऐसे अपराध में दोषी पाए जाने पर सीधे उम्रकैद की सजा दी जा सकती है। नए नियम के अनुसार, धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित व्यक्ति को 60 दिन पहले कलेक्टर को आवेदन देना अनिवार्य होगा। साथ ही अनुष्ठान कराने वाले पुजारी, मौलवी या पादरी को भी पहले से सूचना देनी होगी, वरना इसे अवैध माना जाएगा और तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है।
कानून में शादी के नाम पर धर्म परिवर्तन के मामलों को भी शामिल किया गया है। केवल धर्म बदलने के उद्देश्य से की गई शादी को अमान्य घोषित किया जा सकेगा। साथ ही विदेशी फंडिंग और संस्थाओं की भूमिका पर भी सख्ती बरती जाएगी।
छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026 – मुख्य बिंदु:
- इस कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, झूठी जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना प्रतिबंधित होगा।
- कोई व्यक्ति यदि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले से सूचना देनी होगी।
- प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा।
- विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दवाब, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
- पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा, यह भी विधेयक में स्पष्ट किया गया है।
- अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है।
- यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए जुर्माना हो सकती है।
- सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
- विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे तथा मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी।
धर्मांतरण से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए हर जिले में विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा। इन अदालतों में 6 महीने के भीतर मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे कानून व्यवस्था मजबूत होगी, जबकि विपक्ष ने इस कानून का विरोध जताया है।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि धर्मांतरण में शामिल विदेशी फंडिंग पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। यदि कोई संस्था प्रलोभन या सामूहिक धर्मांतरण में शामिल पाई गई, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा और उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
दरअसल, राज्य के आदिवासी क्षेत्रों जैसे बस्तर, जशपुर और रायगढ़ में धर्मांतरण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। कई जगह यह तनाव गुटीय संघर्ष तक पहुंच चुका है, खासकर नारायणपुर क्षेत्र में हालात गंभीर बने हुए हैं।
आदिवासी और धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों के बीच कई बार विवाद की स्थिति बन चुकी है, जिससे कानून व्यवस्था प्रभावित हुई है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने यह कानून लागू किया है।
जनसंख्या के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और सिख समुदाय के लोग रहते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा आबादी ओबीसी वर्ग की बताई जाती है। हालांकि ये आंकड़े अनुमानित हैं और समय के साथ इनमें बदलाव हो रहा है।
विज्ञापन
यह भी पढ़े -2026 में बिना पंचांग देखे शादी-गृह प्रवेश, जानिए साल की 7 सबसे शुभ तिथियां! हर मांगलिक कार्य होगा सिद्ध..
यह भी पढ़े - New Year 2026: सूर्य का साल रहेगा 2026, घर लाएं ये शुभ चीजें, बढ़ेगा मान-सम्मान और तरक्की.
यह भी पढ़े -सर्दियों में वर्कआउट बना सकता है दिल के लिए खतरा, ठंड में एक्सरसाइज से पहले जान लें ये जरूरी नियम..
भिलाई की पत्रिका न्यूज़ के whatsup ग्रुप से जुड़ने के लिए लिंक पर क्लिक कर ज्वाइन करे

.jpg)

