31 मार्च को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद के लगभग खात्मे की घोषणा के बाद प्रदेश में हालात तेजी से बदले हैं। बीते एक साल में नक्सल प्रभाव में आई कमी का सीधा असर खनन गतिविधियों पर पड़ा है, जिससे राजस्व में बढ़ोतरी साफ नजर आ रही है।
खनिज विभाग के सचिव पी दयानंद ने बताया कि यह उपलब्धि सुशासन, प्रभावी नीतियों और मजबूत निगरानी व्यवस्था का नतीजा है। उन्होंने कहा कि राज्य ने न सिर्फ लक्ष्य हासिल किया बल्कि खनिज आधारित अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है।
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत 6 प्रतिशत वृद्धि दर से कहीं ज्यादा है। इस बढ़ोतरी में एनएमडीसी और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए डिस्पैच रूट्स का बेहतर प्रबंधन अहम रहा है। साथ ही ‘खनिज 2.0’ जैसे आईटी प्लेटफॉर्म ने पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इस बढ़ोतरी को राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उनका कहना है कि राजस्व में वृद्धि से प्रदेश की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी और विकास कार्यों को नई रफ्तार मिलेगी।
आने वाले समय में सरकार की नजर गौण खनिजों को भी ‘खनिज 2.0’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर है। इसके साथ ही खनिज परिवहन की निगरानी के लिए वीटीएस, आई-चेक गेट्स और ड्रोन तकनीक का बड़े स्तर पर उपयोग किया जाएगा, जिससे पूरी प्रणाली डिजिटल और पारदर्शी बन सके।
यह बढ़ती आय सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के विकास की नई कहानी है। अगर ऐसे ही प्रयास जारी रहे, तो आने वाले समय में प्रदेश और भी बड़ी आर्थिक ताकत बन सकता है।
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