मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने जांच शुरू की। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई और संदिग्ध लोगों की पहचान की गई। करीब दो महीने की लगातार जांच के बाद पुलिस को बड़ी सफलता मिली और तीन आरोपियों को पकड़ लिया गया।
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी खिलेश दास मानिकपुरी ने चोरी के जेवर तुलेश्वर सोनकर को सौंप दिए थे। तुलेश्वर ने सोने के जेवर अपनी बहन पुष्पलता को दे दिए। पुष्पलता ने इन जेवरों को आईआईएफएल फाइनेंस कंपनी में गिरवी रखकर गोल्ड लोन ले लिया। इस लोन के पैसों से स्कूटी और महंगा मोबाइल खरीदा गया।
वहीं, चांदी के जेवर तुलेश्वर ने अपनी मौसी माया सोनकर के घर में छुपाकर रखे थे। इस तरह पूरे परिवार ने कहीं न कहीं इस चोरी के सामान का इस्तेमाल किया।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फाइनेंस कंपनी से सोने के जेवर बरामद कर लिए हैं और मौसी के घर से चांदी के जेवर भी जब्त किए गए हैं। इसके अलावा चोरी के पैसों से खरीदी गई स्कूटी, मोटरसाइकिल और मोबाइल भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। जब्त किए गए सामान की कुल कीमत करीब 8 लाख 22 हजार रुपए आंकी गई है।
गिरफ्तार आरोपियों में खिलेश दास मानिकपुरी, भुनेश्वर यादव और तुलेश्वर सोनकर शामिल हैं। ये सभी रायपुर जिले के निवासी हैं और पहले भी इनके खिलाफ अलग-अलग थानों में मामले दर्ज हैं।
पाटन एसडीओपी अनूप लकड़ा ने बताया कि अमलेश्वर थाना और एसीसीयू की टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस पूरे मामले का खुलासा किया है। फिलहाल पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार करने की बात कही जा रही है।
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