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आज शाम से शुरू होगा मृत्यु पंचक! अगले 5 दिन रहेंगे बेहद महत्वपूर्ण,जानिए क्यों माना जाता है साल का सबसे संवेदनशील समय?

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : जून महीने में एक बार फिर पंचक काल की शुरुआत होने जा रही है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस बार यह मृत्यु पंचक के रूप में प्रभाव दिखाएगा, जिसे विशेष सावधानी बरतने वाला समय माना जाता है। ऐसे में कई लोग इसके प्रभाव और इससे जुड़े नियमों को जानना चाह रहे हैं।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य से पहले पंचांग और नक्षत्रों का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में कुछ समय ऐसे भी बताए गए हैं, जिनमें विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। पंचक काल भी इन्हीं में से एक माना जाता है।

11 जून तक रहेगा पंचक काल, जानिए किन कार्यों में बरतनी होगी सावधानी

ज्योतिष गणना के अनुसार 6 जून, शनिवार को शाम 7 बजकर 3 मिनट से पंचक की शुरुआत होगी। शनिवार से आरंभ होने के कारण इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। यह पंचक 11 जून को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगा। इस पूरी अवधि को सावधानी रखने वाला समय माना गया है।

पंचक वह अवधि होती है जब चंद्रमा लगातार पांच नक्षत्रों—धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती में भ्रमण करता है। यह समय लगभग पांच दिनों तक रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान किए गए कुछ कार्य नकारात्मक प्रभाव दे सकते हैं, इसलिए इसे संवेदनशील काल माना जाता है।

शनिवार से शुरू होने वाले पंचक को मृत्यु पंचक कहा जाता है। मान्यता है कि यह अवधि दुर्घटनाओं, बीमारियों और अचानक आने वाली परेशानियों का संकेत दे सकती है। इसी वजह से इस दौरान अतिरिक्त सतर्कता रखने और अनावश्यक जोखिम से बचने की सलाह दी जाती है।

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मृत्यु पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की बात कही गई है, क्योंकि इसे यमराज की दिशा माना जाता है। इसके अलावा घर का लेंटर डालना या छत बनवाना भी शुभ नहीं माना जाता। नया बेड या चारपाई खरीदने अथवा बनवाने से भी परहेज करने की सलाह दी गई है। साथ ही लकड़ी, घास या किसी भी ज्वलनशील वस्तु का संग्रह करना भी उचित नहीं माना गया है।

यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति का निधन हो जाता है, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार सामान्य तरीके से नहीं किया जाता। दोष निवारण के लिए आटे या कुशा से बने पांच पुतलों का विधि-विधान से दाह संस्कार किया जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार को इस प्रकार के अचानक दुखद समाचारों से बचाव मिलता है।

ज्योतिष शास्त्र में मृत्यु पंचक को लेकर भय की बजाय सावधानी पर अधिक जोर दिया गया है। इस दौरान बड़े और मांगलिक कार्यों को टालना तथा जरूरी कार्यों में सतर्कता बरतना ही सबसे उपयुक्त उपाय माना गया है।

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Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निर्णय से पहले अपने विवेक और विशेषज्ञ सलाह का उपयोग करें।

                                                                                                                                      विज्ञापन

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