पीड़ित महिला रेशमा ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपना दर्द बयां किया। उसकी आंखों में आंसू थे और गोद में दर्द से परेशान बेटी। महिला का कहना है कि करीब डेढ़ महीने पहले उसकी बेटी का सड़क हादसा हो गया था, जिसमें उसके दाहिने पैर की हड्डी क्षतिग्रस्त हो गई थी।
महिला का आरोप है कि पैसे नहीं मिलने पर ऑपरेशन करने से मना कर दिया गया और बच्ची को अस्पताल में यूं ही छोड़ दिया गया। इसके बाद वह मदद की उम्मीद लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंची। महिला के अनुसार, डीएम के निर्देश के बाद बच्ची का निशुल्क इलाज करने के आदेश दिए गए।
रेशमा का दावा है कि डीएम के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल में कुछ डॉक्टर उससे नाराज हो गए। उसने आरोप लगाया कि उससे कहा गया कि डीएम इलाज करने नहीं आएंगे। महिला का यह भी आरोप है कि उसकी बेटी की मानसिक स्थिति को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।
बेटी की हालत को देखते हुए रेशमा ने आसपास के लोगों से मदद मांगकर 8 हजार रुपये जुटाए। महिला का कहना है कि यह राशि देने के बाद ही उसकी बेटी का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद वह बेटी को घर ले गई और डॉक्टरों के निर्देशानुसार तय तारीख पर दोबारा जांच के लिए अस्पताल पहुंची।
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रेशमा के अनुसार, चेकअप के दौरान बच्ची घबराई हुई थी। आरोप है कि उसे जबरन बेड पर लिटाया गया और उसके पैर को जोर से मोड़ा गया। इसी दौरान पैर से तेज आवाज आई और बच्ची दर्द से चीख उठी।
महिला का कहना है कि उसने डॉक्टर से आवाज के बारे में पूछा, लेकिन उसे यह कहकर घर भेज दिया गया कि कोई समस्या नहीं हुई है। अस्पताल से बाहर निकलने के बाद उसने देखा कि बच्ची के पैर में सूजन बढ़ गई थी और पैर की स्थिति पहले से अधिक खराब दिखाई दे रही थी।
रेशमा का आरोप है कि पूरी रात उसकी बेटी दर्द से परेशान रही। अगले दिन उसने एक निजी सेंटर में एक्स-रे कराया। महिला का दावा है कि रिपोर्ट में वही हड्डी दोबारा क्षतिग्रस्त दिखाई दी, जिसका पहले ऑपरेशन किया गया था।
इसके बाद महिला फिर अस्पताल पहुंची, लेकिन उसका आरोप है कि वहां भी उसे कोई राहत नहीं मिली। आखिरकार वह अपनी बेटी को लेकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंची और अधिकारियों व मीडिया के सामने न्याय की मांग की।
रेशमा ने मांग की है कि उसकी बेटी का समुचित इलाज कराया जाए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इस मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुनील तेवतिया ने कहा कि मामला गंभीर है। उन्होंने बताया कि बिना संबंधित पक्ष का पक्ष जाने कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और जांच के लिए टीम गठित की जा रही है। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अवैध वसूली की पुष्टि होती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल पीड़ित मां अपनी बेटी के इलाज और न्याय की उम्मीद में अधिकारियों के फैसले का इंतजार कर रही है।
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ऑफिस से लौटते हुए राहुल ने जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला,
उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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