मृतक की पहचान 35 वर्षीय पुष्पेंद्र परमार के रूप में हुई है। वे मूल रूप से मध्य प्रदेश के सतना के रहने वाले थे और फिलहाल भिलाई के राधिका नगर में परिवार के साथ किराए के मकान में रह रहे थे।
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुष्पेंद्र परमार जेपी सीमेंट प्लांट में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। कंपनी लंबे समय से बंद है और कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है। बताया गया कि कर्मचारी आज भी रोज सुबह-शाम इस उम्मीद में प्लांट पहुंचकर अटेंडेंस लगाते हैं कि कभी न कभी उनका बकाया वेतन मिलेगा और परिवार की स्थिति सुधरेगी। लेकिन आर्थिक तंगी और कर्ज के दबाव के बीच पुष्पेंद्र ने फंदा लगाकर अपनी जान दे दी।
27-28 महीने से नहीं मिली थी सैलरी
मृतक की पत्नी श्वेता सिंह परमार ने बताया कि पिछले करीब 27 से 28 महीनों से पुष्पेंद्र को वेतन नहीं मिला था। कंपनी की ओर से 10 लाख रुपये से अधिक का भुगतान भी बकाया था। इसी वजह से पूरा परिवार लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा था।
उन्होंने बताया कि घर चलाने के लिए पुष्पेंद्र ने कुछ समय पहले ब्लिंकिट में डिलीवरी का काम भी शुरू किया था। लेकिन इस काम से भी पर्याप्त आमदनी नहीं हो रही थी। पेट्रोल और अन्य खर्च निकालने के बाद महीने में केवल 4 से 5 हजार रुपये ही बचते थे, जबकि घर का किराया ही 4 हजार रुपये था। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया था।
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तीन क्रेडिट कार्ड से लिया 10 से 15 लाख रुपये का कर्ज
पत्नी के अनुसार आर्थिक परेशानी बढ़ने पर पुष्पेंद्र ने अलग-अलग कंपनियों के तीन क्रेडिट कार्ड के जरिए 10 से 15 लाख रुपये तक का कर्ज लिया था। पिछले कुछ समय से क्रेडिट कार्ड कंपनियों की ओर से लगातार फोन आ रहे थे। भुगतान नहीं होने पर उन पर दबाव बनाया जा रहा था और फोन पर गाली-गलौज भी की जा रही थी। इससे वे मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगे थे।
रात 3 बजे कमरे में मिला शव
पत्नी ने बताया कि घटना वाली रात करीब ढाई बजे पुष्पेंद्र घर के एक कमरे में टॉवेल से फंदा बनाकर चले गए। रात करीब 3 बजे जब उनकी नींद खुली तो पति बिस्तर पर नहीं थे। पहले उन्हें लगा कि वे टॉयलेट गए होंगे, लेकिन वहां नहीं मिले। इसके बाद पीछे के कमरे में जाकर देखा तो उनका शव फंदे पर लटका मिला।
पुष्पेंद्र अपने पीछे पत्नी और 11 साल के बेटे को छोड़ गए हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद उनके परिजन सतना से भिलाई के लिए रवाना हो गए। उनके पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।
कर्मचारियों में आक्रोश
घटना की जानकारी मिलते ही जेपी सीमेंट प्लांट के कई कर्मचारी अस्पताल पहुंचे। कर्मचारियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पिछले 28 महीनों से वेतन नहीं मिला है। घर चलाने के लिए सभी को कर्ज लेना पड़ा है और आर्थिक हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
कर्मचारियों ने बताया कि कुछ साल पहले भी आर्थिक तंगी की वजह से एक कर्मचारी ने ऐसा ही बड़ा कदम उठाया था। उस समय जल्द वेतन देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक कर्मचारियों को उनका पूरा बकाया भुगतान नहीं मिल सका।
पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों का इंतजार
सुपेला थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए सुपेला अस्पताल भेज दिया। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजनों का इंतजार किया जा रहा है। मृतक का छोटा भाई सतना से भिलाई पहुंच रहा है। उसके आने के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। पुलिस ने मर्ग कायम कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
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ऑफिस से लौटते हुए राहुल ने जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला,
उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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