पश्चिम बंगाल और उससे लगे उत्तरी झारखंड के ऊपर बने लो-प्रेशर सिस्टम का असर अब छत्तीसगढ़ में साफ दिखाई दे रहा है। इसी सिस्टम की वजह से पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के उत्तर और मध्य हिस्सों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई, जबकि कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश रिकॉर्ड की गई।
मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के लिए मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही आकाशीय बि*जली गिरने की भी संभावना जताई गई है। हालांकि 1 जून से अब तक प्रदेश में औसत मौसमी बारिश सामान्य से 25 प्रतिशत कम बनी हुई है।
सरगुजा जिले में बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से चार बच्चे झुलस गए। इनमें दो बच्चों की जान चली गई, जबकि दो बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों सगे भाइयों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई गई है।
जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा स्थित कर्रा नाला जलाशय का एक हिस्सा भारी बारिश के कारण बह गया। इसके बाद प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए 125 लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया।
बिलासपुर में लगातार हो रही बारिश के चलते नेशनल हाईवे-49 पर जलभराव की स्थिति बन गई। कई जगहों पर सड़क के ऊपर 4 से 5 फीट तक पानी बहता दिखाई दिया। वहीं कोटमीसोनार में लीलागर नदी के पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण इस मार्ग को भी सुरक्षा के मद्देनजर बंद कर दिया गया है। प्रशासन पूरे हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।
बंगाल-झारखंड का लो-प्रेशर सिस्टम कैसे डाल रहा असर?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिम बंगाल और उत्तरी झारखंड के ऊपर बना ऊपरी हवा का साइक्लोनिक सर्कुलेशन लगातार नमी को छत्तीसगढ़ की ओर खींच रहा है। वहीं मानसून ट्रफ भी उत्तर भारत से होते हुए झारखंड और बंगाल तक सक्रिय बना हुआ है।
इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के ऊपर भी मौसम संबंधी सिस्टम सक्रिय हैं। इन सभी प्रणालियों के एक साथ सक्रिय रहने से प्रदेश में लगातार बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
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ऑफिस से लौटते हुए राहुल ने जैसे ही कमरे का दरवाज़ा खोला,
उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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