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जिससे किसी भी भवन की भौगोलिक स्थिति का एक एड्रेस एवं निश्चित जी.पी.एस. लोकेशन के साथ आॅनलाईन मैप का पता लगया जा सकता है। निगम क्षेत्र में निवासरत नागरिक जो अपने मकानो, दुकानो का संपत्तिकर, जलकर, भू-भाटक आदि करो का वास्तविक सर्वे पारदर्शिता के साथ हो जाएगा।
जी.पी.एस. के माध्यम से निगम के सभी साफ्टवेयर को इससे जोड़ा जायेगा, जिससे निगम क्षेत्र के किसी भी भवन का पहचान हो जायेगा और भवन को ढ़ुढने की आवश्यकता नहीं पड़ेगा। सभी भवनों में डिजिटल डोर एवं नम्बर प्लेट लगाया जायेगा, जिसमें क्यू.आर.कोड लगाया जाएगा।
जी.आई.एस. तकनीक के माध्यम से सभी वार्डो के भवन एवं भूमियो का डेटाबेस तैयार कर साफ्टवेयर एवं एप के माध्यम से नागरिको को सुविधा प्रदान की जायेगी तथा निगम का काम भी सरल एवं सुगम हो जाएगा। आयुक्त श्री देवेश कुमार ध्रुव जी ने विशेष रूचि लेकर इसके लिए अलग से एक सेटअप बनवाया है, दिलीप कुर्वे टेक्निकल टीम के माध्यम से जहां पर इसके संबंध में तैयारी की कर रहे हैं, जब यह पूर्ण रूप से मूर्तरूप लेगा।
निश्चित ही यह सब के लिए फायदेमंद होगा। साथ ही नगर निगम के द्वारा बिछाई गई पाईप लाईन, सिवरेज सिस्टम का भी मेपिंग हो जाएगा। इन सब से नगर निगम के आय में बढ़होत्तरी होगी। आम नागरिको को भी इससे सुविधा होगा की उनकी संपत्ति का वास्तविक मूल्यांकन नियमानुसार हो जायेगा। जी.आई.एस आधारित साफ्टवेयर बनाये जाने की महापौर परिषद द्वारा तारिफ की गई।
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