भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं चलेगा: बस्तर में टूटी पुलिया से नदी पार कर रहे स्टूडेंट्स, हाईकोर्ट सख्त
(छग) बस्तर के दंतेवाड़ा और आसपास के इलाकों में स्कूली बच्चे आज भी जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।टूटी पुलिया और उफनती धार को पार कर स्कूल जाना इन बच्चों की मजबूरी बन गई है।अब इस गंभीर स्थिति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने कहा- बच्चों की जिंदगी से समझौता बर्दाश्त नहीं
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु शामिल हैं, ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि,- यह बच्चों की जिंदगी से जुड़ा संवेदनशील मामला है, और ऐसी हालत लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं की जा सकती। सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह अब तक की पूरी कार्रवाई की जानकारी दे।
मीडिया रिपोर्ट से खुला मामला, वायरल हुईं तस्वीरें
यह मामला तब सामने आया जब मीडिया में स्कूली बच्चों की वायरल तस्वीरें और वीडियो दिखाई देने लगे।बच्चे पानी से लबालब नदी पार कर स्कूल जा रहे थे।कोर्ट ने इसे बच्चों की जान से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए स्वतः संज्ञान में लिया।
सरकार ने दिया जवाब, कोर्ट ने मांगा नया हलफनामा
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने बताया कि बड़े पुल के निर्माण का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।तकनीकी जांच में 12 बिंदुओं पर आपत्तियां आई थीं, जिनका कांकेर कलेक्टर ने स्पष्टीकरण देकर जवाब भेजा।
अब संशोधित डीपीआर 20 अगस्त को गृह मंत्रालय को भेज दी गई है।कोर्ट ने पूछा कि अब तक केंद्र सरकार से क्या बातचीत हुई और कितनी प्रगति हुई?
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: बच्चों की जान को खतरे में नहीं डाल सकते
कोर्ट ने साफ कहा कि -हर दिन अखबारों में खबरें आ रही हैं कि बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं। यह स्थिति असहनीय है।
अब राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक केंद्र से हुई बातचीत और कार्रवाई का नया हलफनामा दाखिल करना होगा।अगली सुनवाई 22 सितंबर को तय की गई है।
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बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले!
अगर आपके आसपास भी इस तरह की स्थिति है, जहां बच्चे टूटी सड़कों, पुलिया या खतरनाक रास्तों से स्कूल जाते हैं, तो स्थानीय प्रशासन और मीडिया तक आवाज़ उठाएं।
बच्चों की शिक्षा जरूरी है, लेकिन जान की कीमत पर नहीं।इस खबर को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें ताकि आवाज़ उन तक पहुंचे, जिनके पास समाधान है।
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