भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी удар! मितानिन और NHM कर्मचारी एक साथ हड़ताल पर
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली 75 हजार मितानिन और 16 हजार NHM कर्मचारियों ने एक साथ हड़ताल पर चले गए हैं। टिका व्यवहार, नवजात देखभाल जैसे जरूरी काम पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था लड़खड़ा गई
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत बचपन की टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल, TB-मलेरिया रोकथाम जैसी सेवाएं बाधित हुई हैं।ANM, स्टाफ नर्स, CHO जैसे कर्मियों पर निर्भर स्वास्थ्य विभाग अब डाटा एंट्री व दैनिक रिपोर्टिंग में भी ठप है।
18 अगस्त से जारी असर – केवल 38% कर्मचारी हैं हाजिर
पिछले कई असेंबली सत्रों में छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य केंद्रों में काम की रफ्तार अचानक धीमी पड़ी है।करीब 60% संविदा कर्मी NHM से जुड़े होने के चलते 18 अगस्त से अधिकांश अनुपस्थित हैं।
नवा रायपुर तक धरना-प्रदर्शन, ताले लगे स्वास्थ्य केंद्र
हर जिला मुख्यालय में NHM कर्मचारी संगठन उग्र धरने दे रहा है।नवा रायपुर के धरना स्थल से लेकर हर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं, और ग्रामीण परेशान हैं।
मांगों की लंबी-लिस्ट, सरकार पर दबाव
संविलियन और स्थायीकरण
पब्लिक हेल्थ कैडर
ग्रेड पे और पारदर्शी मूल्यांकन
27% वेतन वृद्धि
आरक्षण और अनुकंपा भर्ती
मेडिकल अवकाश
स्थानांतरण नीति
10 लाख कैशलेस स्वास्थ्य बीमा
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गांवों में माताओं की देखभाल में भारी कमी
75 हजार मितानिनें गर्भवती देखभाल, कुपोषण उन्मूलन, प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य जागरूकता की जिम्मेदारी प्रभारी रही हैं। उनकी अनुपस्थिति से ग्रामीण चिकित्सा सहायता बुरी तरह बाधित हुई है।
“इस तरह की हड़ताल अब एक संस्कृति बन चुकी है। कई बार सरकार जवाब देती है, पर कई बार पेंच फँस जाता है। दोनों पक्षों को संवाद के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।”
राजनीतिक जंग तेज: कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार का रवैया तानाशाही जैसा है।– “नक्सा का उपयोग करके कर्मचारियों को डराया-धमकाया जा रहा है।”भाजपा प्रवक्ता डॉ. विजय शंकर मिश्रा ने कहा कि सरकार सतर्क है, और आधी मांगें पूरी की जा चुकी हैं।
गांव, कस्बों में स्वास्थ्य संकट का खौफ
रायपुर से लेकर शहरी और ग्रामीण इलाकों तक पूछताछ उठ रही है — “अस्पताल बंद, तो किससे इलाज?”जनता का सवाल साफ है: “हमारी रक्षा कौन करेगा?”
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आप क्या सोचते हैं इस संघर्ष पर?
क्या हड़ताल समाधान की राह है या फिर संवाद?
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