भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ में मनरेगा कार्यों को लेकर अब किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं बचेगी। राज्य सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने और ग्रामीणों को जानकारी से जोड़ने के लिए QR कोड और GIS तकनीक का सहारा लिया है।
अब गांव के लोग अपने पंचायत भवन या सार्वजनिक जगह पर लगे क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन कर, पिछले तीन साल में हुए कार्यों और खर्च का पूरा हिसाब देख सकेंगे। यह पहल ग्रामीणों के लिए एक तरह की डिजिटल क्रांति मानी जा रही है।
कैसे काम करेगा सिस्टम?
प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए अलग-अलग क्यूआर कोड तैयार किए गए हैं। इन्हें पंचायत भवन और गांव के प्रमुख स्थानों पर लगाया गया है। ग्रामीण जैसे ही कोड स्कैन करेंगे, उन्हें मनरेगा परियोजनाओं, खर्च, स्वीकृत राशि और चल रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी तुरंत मिल जाएगी।
ग्रामीणों के लिए आसान भाषा में डेटा
पहले ये डेटा सिर्फ जिला कार्यालय या सरकारी वेबसाइटों पर तकनीकी भाषा में उपलब्ध होता था, लेकिन अब यह जानकारी सीधे गांव के नागरिकों की उंगलियों पर होगी।
GIS और सैटेलाइट मैपिंग की मदद
विष्णुदेव साय सरकार ने योजना निर्माण के लिए युक्तिधारा पोर्टल और GIS तकनीक का उपयोग शुरू कर दिया है। सैटेलाइट मैपिंग से श्रम बजट तैयार किया जाएगा और ग्राम सभा से मंजूरी के बाद उसकी जानकारी भी QR कोड से मिलेगी।
लोगों को सिखा रहे रोजगार सहायक
स्वयं सहायता समूह और ग्राम रोजगार सहायक ग्रामीणों को QR कोड स्कैन कर जानकारी प्राप्त करने का तरीका समझा रहे हैं। जिनके पास डिजिटल सुविधा नहीं है, उनके लिए पंचायत की दीवारों पर बजट और काम की सूची लिखी जाएगी।
कर्मचारियों को ट्रेनिंग
नई व्यवस्था को लागू करने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बजट तय होने के बाद हर पंचायत की दीवार पर इसे प्रदर्शित किया जाएगा ताकि किसी भी नागरिक को यह पता चल सके कि आने वाले साल में कौन से कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
👉 यह पहल सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास में बड़ा कदम है।
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