भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : पितृपक्ष का समय चल रहा है और इसी दौरान हर घर में पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। कहा जाता है कि पितरों का आशीर्वाद जीवन की हर मुश्किल को आसान बना देता है, लेकिन जब वे रूठ जाते हैं तो उसे पितृदोष कहा जाता है। यह दोष जीवन में कई तरह की बाधाएं लेकर आता है।
पितृदोष क्या है?
पितृदोष का मतलब है कि पूर्वज आपसे नाराज़ हैं। ज्योतिष के अनुसार अगर कुंडली में राहु और सूर्य की स्थिति विशेष रूप से पंचम भाव में प्रतिकूल हो तो यह पितृदोष का कारण बनता है। इसके अलावा यदि पूर्वजों का सही संस्कार न किया जाए, उनका सम्मान न किया जाए, सांप की हत्या हो जाए या पेड़ों की कटाई की जाए, तब भी पितृदोष लगता है।
पितृदोष के लक्षण
अगर किसी पर पितृदोष है तो उसके जीवन में ये लक्षण देखने को मिल सकते हैं–
परिवार में कलह और अशांति बनी रहती है।
संतान सुख में बाधाएं आती हैं या संतान बार-बार बीमार रहती है।
करियर और मेहनत में सफलता नहीं मिलती।
सपनों में पितरों का आना।
घर में अचानक पीपल का पेड़ उग आना।
परिश्रम का फल न मिलना।
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पितृदोष का निवारण
पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए सबसे ज़रूरी है कि पितृपक्ष में श्राद्ध और तर्पण करें। अमावस्या और पूर्णिमा के दिन दान देना शुभ माना जाता है। गाय, मछली, चींटी और कुत्तों को अन्न और जल देने से भी पितर प्रसन्न होते हैं।
नीम, पीपल और बरगद जैसे पेड़ लगाना और उन्हें सींचना पुण्यकारी माना गया है। शनिवार और अमावस्या को पीपल के नीचे दीपक जलाना भी पितृदोष निवारण का एक प्रभावी उपाय है|
(Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक आस्था पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। भिलाई की पत्रिका न्यूज़ इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता।)
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