भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : पितरों का आशीर्वाद चाहिए तो यह पढ़िए...
भाद्रपद पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत हो गई है। 8 सितंबर से 21 सितंबर तक चलने वाले इन विशेष 15 दिनों में हर हिंदू घर में पूर्वजों को स्मरण करते हुए धूप-ध्यान, श्राद्ध और तर्पण किया जाता है।
पितरों की कृपा से मिलती है शांति और सुख
उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा बताते हैं कि पितृ पक्ष में सभी ज्ञात और अज्ञात पूर्वजों के लिए धूप-ध्यान जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि इन दिनों पितर देव घर आते हैं और संतुष्ट होकर आशीर्वाद देते हैं। उनका आशीर्वाद जीवन की समस्याएं दूर करता है।
धूप-ध्यान का सही समय
धूप-ध्यान और श्राद्ध कर्म दोपहर 12 बजे के आसपास करना चाहिए, जिसे कुतुप काल कहा जाता है। यह समय पितरों के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। जबकि देवी-देवताओं की पूजा सुबह और शाम को करनी चाहिए।
धूप-ध्यान नहीं करने पर पितर हो सकते हैं नाराज़
अगर कोई अपने पितरों को याद नहीं करता, तो वे अतृप्त और दुखी रहते हैं। ऐसे पितर अपने वंशजों को शाप भी दे सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि इन दिनों में पिंडदान, तर्पण और दान जरूर करें।
अगर मृत्यु तिथि मालूम नहीं हो तो क्या करें?
जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद नहीं है, उनके लिए 21 सितंबर को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर धूप-ध्यान, पिंडदान और तर्पण करें। इस दिन भूले हुए श्राद्ध भी किए जा सकते हैं।
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धूप-ध्यान का सही समय
धूप-ध्यान और श्राद्ध कर्म दोपहर 12 बजे के आसपास करना चाहिए, जिसे कुतुप काल कहा जाता है। यह समय पितरों के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। जबकि देवी-देवताओं की पूजा सुबह और शाम को करनी चाहिए।
धूप-ध्यान नहीं करने पर पितर हो सकते हैं नाराज़
अगर कोई अपने पितरों को याद नहीं करता, तो वे अतृप्त और दुखी रहते हैं। ऐसे पितर अपने वंशजों को शाप भी दे सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि इन दिनों में पिंडदान, तर्पण और दान जरूर करें।
अगर मृत्यु तिथि मालूम नहीं हो तो क्या करें?
जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद नहीं है, उनके लिए 21 सितंबर को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर धूप-ध्यान, पिंडदान और तर्पण करें। इस दिन भूले हुए श्राद्ध भी किए जा सकते हैं।
क्या कर सकते हैं इन दिनों?
नदियों में स्नान कर पितरों के नाम पर दान करें।
गंगाजल से स्नान करके तर्पण और धूप-ध्यान करें।
जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े, अनाज का दान करें।
गरुड़ पुराण और भागवत का पाठ करें, प्रवचन सुनें।
मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं।
घर में शांति और सफाई जरूरी
इन दिनों घर में गंदगी, लड़ाई-झगड़ा, नशा और मांसाहार से बचना चाहिए। पितरों को सात्विक भोजन ही अर्पित करें। लहसुन-प्याज से बनी चीजें न चढ़ाएं।
जानवरों की सेवा भी पुण्य का काम
कुत्तों, गायों और कौवों को भोजन-पानी दें। ऐसा करना पितरों को तृप्त करता है।
रोज सुबह उठें, शाम को दीप जलाएं
धार्मिक मान्यता है कि हर शाम पितरों के स्मरण में दक्षिण दिशा में दीपक जलाना चाहिए। साथ ही, उनसे जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए।
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पितृ पक्ष एक भावनात्मक जुड़ाव है...
यह केवल कर्मकांड नहीं, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। आइए, इस पितृ पक्ष में हम सब मिलकर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए सच्चे मन से श्रद्धा अर्पित करें।ऐसी लोकल और धार्मिक खबरों के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।
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