भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : पितृपक्ष का समय हर हिंदू परिवार के लिए बेहद पवित्र माना जाता है।
इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पितृपक्ष सिर्फ माता-पिता के लिए ही नहीं है? अगर कुछ खास लोगों का तर्पण छूट जाए तो शास्त्रों के अनुसार पितृदोष लग सकता है।
गरुड़ पुराण का बड़ा रहस्य
धर्मग्रंथों और गरुड़ पुराण में कहा गया है कि तर्पण केवल माता-पिता तक सीमित नहीं है। अगर निम्न 6 श्रेणी के व्यक्तियों का श्राद्ध नहीं किया गया तो पूरा कर्म अधूरा माना जाता है और पितरों की आत्मा को तृप्ति नहीं मिलती।
1. गुरु और आचार्य
शास्त्रों में गुरु को माता-पिता से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है। इसलिए पितृपक्ष में गुरु और आचार्य को पितृरूप मानकर उनका तर्पण करना जरूरी है।
2. भ्राता और संतान
अगर कोई भाई या संतान असमय मृत्यु को प्राप्त हो जाए, तो उनका श्राद्ध करना भी आवश्यक है। इनके बिना पितृपूजन अधूरा रहता है।
3. अतिथि और मित्र
जिन मित्रों या स्नेहीजनों का निधन हो चुका है, उनके नाम का तर्पण करने से पितरों को शांति और तृप्ति मिलती है।
4. जिनका कोई वंशज न हो
गरुड़ पुराण के अनुसार, जिनकी संतान नहीं है, अगर उनका श्राद्ध कोई न करे तो उनकी आत्मा भटकती रहती है। ऐसे लोगों का तर्पण करना आवश्यक है।
5. अकाल मृत व्यक्ति
जो लोग असमय मृत्यु को प्राप्त हुए हों, उनका श्राद्ध करना भी बेहद जरूरी है। इसे छोड़ने पर पितृपूजन अधूरा माना जाता है।
6. त्यागीजन (सन्यासी)
जिन्होंने संसार त्याग कर सन्यास लिया है, उनके लिए भी तर्पण करना शास्त्रों में अनिवार्य बताया गया है।
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शास्त्र कहते हैं कि पितृपक्ष का श्राद्ध तभी सफल होगा जब इन सभी का विधिपूर्वक स्मरण और तर्पण किया जाए। अगर इनमें से कोई छूट गया, तो परिवार पर पितृदोष का असर हो सकता है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. भिलाई की पत्रिका न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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