रायपुर में गणेश प्रतिमाओं के कार्टून व क्यूट लुक पर बवाल! शंकराचार्य बोले- यह पाप है, मूर्तिकार भी दोषी! सर्व हिंदू समाज ने की प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग..


भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : रायपुर में गणेश प्रतिमाओं के बदले स्वरूप पर मचा घमासान

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश की प्रतिमाओं के बदले हुए रूप को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। सर्व हिंदू समाज ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

शंकराचार्य का कड़ा बयान: मूर्तिकार भी पाप के भागी

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा है कि गणेश प्रतिमा में किसी और को दिखाना पाप है। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के प्रयोग धार्मिक विकृति हैं और ऐसे मूर्तिकार भी दोष के भागीदार हैं।

उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि सभी देवी-देवताओं के स्वरूप पहले से निश्चित हैं। उनमें मनमाने बदलाव की न तो अनुमति है और न ही इसकी कोई गुंजाइश होनी चाहिए।

रायपुर में गणेश प्रतिमाओं के कार्टून व क्यूट लुक पर बवाल!

हिंदू संगठनों का ऐलान- बर्दाश्त नहीं होगा अपमान

सर्व हिंदू समाज के नीलकंठ महाराज और विश्वदिनी पांडेय ने कहा कि रायपुर में कुछ जगहों पर पारंपरिक स्वरूप से हटकर गणेश प्रतिमाएं कार्टून या क्यूट लुक में बनाई गई हैं। इससे बच्चों और युवाओं में भगवान की छवि को लेकर भ्रम पैदा हो रहा है।

उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि जिन पंडालों में ऐसी प्रतिमाएं स्थापित हैं, उनका तुरंत विसर्जन कराया जाए और आयोजकों पर सख्त कार्रवाई हो। वरना समाज को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी।

मिडिया के सवाल, शंकराचार्य के जवाब
मिडिया ने इस पूरे विवाद को लेकर शंकराचार्य से सीधा संवाद किया। उन्होंने बताया:

  • प्रतिमाएं मिट्टी की ही होनी चाहिए:
    शास्त्रों में मिट्टी की प्रतिमा का निर्देश है ताकि विसर्जन से पर्यावरण को हानि न हो। प्लास्टर ऑफ पेरिस या प्लास्टिक जैसी चीजें न शास्त्रसम्मत हैं, न पर्यावरण के अनुकूल।

  • रूपों में बदलाव की अनुमति नहीं:
    महर्षियों ने अनुभव से जो रूप निर्धारित किए हैं, उन्हीं के अनुसार पूजन संभव है। मन मुताबिक रूप चुनने की अनुमति है, लेकिन नया स्वरूप गढ़ना पूरी तरह से गलत है।

  • पीढ़ियों पर पड़ रहा असर:
    इस तरह के बदलाव नई पीढ़ी की धार्मिक समझ को भ्रमित कर देंगे। धीरे-धीरे भगवान के असल स्वरूप भुला दिए जाएंगे।

  • क्या ये रचनात्मकता है?:
    शंकराचार्य ने साफ कहा कि यह रचनात्मकता नहीं, विकृति है। भगवान के स्वरूप के साथ प्रयोग आस्था का अपमान है।

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स्थानीय लोगों में गुस्सा, माहौल गर्म

रायपुर की सड़कों पर और पंडालों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा गर्म है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि धार्मिक परंपराओं से खिलवाड़ किसी भी हाल में स्वीकार नहीं होगा।

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