भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : महिलाओं के लिए बड़ी राहत की खबर!
राजस्थान में अब अनचाहे गर्भ से मुक्ति पाना बेहद आसान हो गया है। माचिस की तीली जितनी छोटी ‘सब डर्मल कॉन्ट्रासेप्टिव इम्प्लांट’ स्टिक महिलाओं की बांह में लगाकर 3 साल तक सुरक्षा प्रदान करती है। यह सरकारी योजना मुफ्त में उपलब्ध है और जयपुर, जोधपुर जैसे शहरों में धीरे-धीरे लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और इस नई तकनीक के बारे में जानने की उत्सुकता दिखाई।
क्या है यह चमत्कारी स्टिक?
यह इम्प्लांट एक छोटी सी रबर जैसी चिप है, जो कोहनी से थोड़ा ऊपर स्किन के नीचे फिट की जाती है। इसकी लंबाई महज 4 सेंटीमीटर और चौड़ाई 2 मिलीमीटर है, जो बाहर से दिखती नहीं, लेकिन छूने पर महसूस होती है। इसमें प्रोजेस्टेरोन हार्मोन होता है, जो धीरे-धीरे रिलीज होकर गर्भधारण को रोकता है। अगर महिला दाहिनी हाथ से काम करती है (राइट हैंडेड), तो स्टिक बाईं बांह में, और बाईं हाथ से काम करने वाली (लेफ्ट हैंडेड) महिलाओं में दाईं बांह में लगाई जाती है। इसे निकालने पर गर्भ धारण की क्षमता पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता, जो इसे खास बनाता है।
कैसे लगती है यह स्टिक?
इस प्रक्रिया में महज 5 मिनट लगते हैं और इसे स्पेशल एप्लीकेटर की मदद से लगाया जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए न बेहोशी की जरूरत पड़ती है और न ही किसी ऑपरेशन थिएटर की। यह पूरी तरह पेनलेस है, जिससे महिलाओं को कोई परेशानी नहीं होती। इसे लगाने के बाद महिला अपनी मर्जी से कभी भी इसे डॉक्टर से निकलवा सकती है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर नाराज़गी है कि यह सुविधा अभी सभी गांवों तक नहीं पहुंची है।
कैसे काम करती है यह गर्भनिरोधक?
इस स्टिक में 68 मिलीग्राम इटोनोजेस्ट्रल सॉल्ट (Etonogestrel) होता है, जो ब्लड में धीरे-धीरे घुलकर 99.9% तक प्रेग्नेंसी को रोकता है। यह 3 साल तक प्रभावी रहता है और इस दौरान अनचाहे गर्भ का कोई डर नहीं रहता। हालांकि, कुछ बीमारियों से ग्रस्त महिलाओं जैसे माइग्रेन, लिवर कैंसर या ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं को इसे नहीं लगवाना चाहिए। शुरुआती चार महीनों में 20% महिलाओं में पीरियड अनियमित हो सकते हैं और 1-2 किलो वजन बढ़ने की शिकायत भी सामने आई है, लेकिन यह सामान्य माना जाता है।
राजस्थान में तेजी से बढ़ रहा इसकी लोकप्रियता
भारत सरकार के परिवार नियोजन पायलट प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान में इसकी शुरुआत हो चुकी है। जयपुर, जोधपुर और उदयपुर के चुनिंदा सरकारी अस्पतालों में अब तक 2500 से ज्यादा महिलाओं को यह इम्प्लांट लगाया जा चुका है। जयपुर के महिला चिकित्सालय में 880, जनाना अस्पताल में 700, और अन्य जगहों पर सैकड़ों महिलाओं ने इसका लाभ उठाया है। 85 महिलाओं ने इसे निकलवाया भी है, जो इसकी लचीलापन दिखाता है। करीब 150 गायनोकोलॉजिस्ट को ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जिसमें जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज की डॉ. ओबी नागर अहम भूमिका निभा रही हैं। जल्द ही यह सुविधा पूरे प्रदेश के अस्पतालों में शुरू होने वाली है।
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कौन लगा सकता है और कब?
यह इम्प्लांट पीरियड के किसी भी दिन लगाया जा सकता है, बशर्ते महिला गर्भवती न हो। अगर इसे पीरियड के पहले 5 दिनों में लगवाया जाए, तो तुरंत असर होता है। 5 दिन बाद लगवाने पर 7 दिन तक अतिरिक्त गर्भनिरोधक इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। स्तनपान कराने वाली या बच्चा न चाहने वाली महिलाओं के लिए भी यह सुरक्षित है। डॉ. ओबी नागर कहती हैं, "यह नसबंदी की तरह प्रभावी है, लेकिन इसे आसानी से हटाया जा सकता है।
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कितना है खर्च और क्या हैं फायदे?
यह इम्प्लांट सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत पूरी तरह मुफ्त है। डॉ. नागर बताती हैं कि 3 साल का अंतर मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद है। इससे गर्भनिरोधक गोलियां, कॉपर टी, अंतरा इंजेक्शन या नसबंदी की जरूरत नहीं पड़ती। राजस्थान में 20% फर्टिलिटी अनचाही है और 52% गर्भधारण अपर्याप्त अंतराल में होते हैं, जो जोखिम भरे हैं। इसलिए सरकार ने 10 राज्यों में इसकी शुरुआत की है। इलाके के लोगों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है कि यह सुविधा जल्द से जल्द गांवों तक पहुंचे।
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