भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : शराब घोटाले में बड़ा फैसला!
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में आरोपी कवासी लखमा को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने साफ कहा कि वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। लखमा बीते 8 महीने से जेल में बंद हैं।
हाईकोर्ट में दायर थी जमानत याचिका
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कवासी लखमा ने गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जमानत अर्जी लगाई थी। उनका कहना था कि यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और उनके खिलाफ सीधे कोई सबूत नहीं है। उन्होंने दलील दी कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
सह आरोपियों को मिली जमानत
लखमा ने यह भी तर्क दिया कि सह अभियुक्त अरुणपति त्रिपाठी, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनिल टुटेजा और अरविंद सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, इसलिए उन्हें भी राहत मिलनी चाहिए।
हर महीने 2 करोड़ रुपए का आरोप
जांच एजेंसी का दावा है कि शराब सिंडिकेट से कवासी लखमा को हर महीने करीब 2 करोड़ रुपए मिलते थे। कुल मिलाकर 72 करोड़ रुपए की अवैध कमाई का आरोप उन पर है।
ED ने किया था विरोध
सुनवाई के दौरान ईडी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि लखमा की इस घोटाले में अहम भूमिका रही है और उनकी रिहाई से गवाह प्रभावित हो सकते हैं। कोर्ट ने ईडी की दलील से सहमति जताते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
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