कांकेर में नक्सलियों की बड़ी घर वापसी: टॉप लीडर राजू समेत 100 नक्सलियों ने हथियार डाले, सुकमा में ने हथियार डाले.. 27 ने


भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को झटका! कांकेर जिले में मंगलवार को टॉप नक्सली लीडर राजू सलाम समेत करीब 100 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए।

इन सभी नक्सलियों ने कांकेर जिले के कामतेड़ा स्थित BSF कैंप में सरेंडर किया। राजू सलाम, कमांडर प्रसाद और मीना जैसे बड़े नाम इस लिस्ट में शामिल हैं। जंगल छोड़कर ये नक्सली मुख्यधारा में लौट आए हैं। इन्हें सुरक्षा व्यवस्था के बीच बस के जरिए कैंप लाया गया। BSF कैंप में इस दौरान हाई अलर्ट जारी किया गया।

छत्तीसगढ़ के कांकेर में टॉप नक्सली लीडर राजू सलाम समेत 100 नक्सलियों का BSF कैंप में सरेंडर — ऐतिहासिक पल की तस्वीर

राजू सलाम कंपनी नंबर 5 का कमांडर और डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM) था। वह रावघाट एरिया में 20 साल से ज्यादा समय से सक्रिय था और जिले में हुई कई बड़ी घटनाओं का मास्टरमाइंड माना जाता है।

इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण से इलाके में नक्सलवाद के खात्मे की नई उम्मीद जगी है। कांकेर पुलिस इन सभी की पहचान की प्रक्रिया में जुटी है। उम्मीद है कि जल्द ही सभी नक्सलियों को जिला या संभागीय मुख्यालय में मीडिया के सामने लाया जाएगा।

इसी बीच बड़ा घटनाक्रम महाराष्ट्र में भी देखने को मिला।

मंगलवार को गढ़चिरौली में मोस्ट वांटेड पोलित ब्यूरो सदस्य भूपति उर्फ मोजुल्ला वेणुगोपाल राव ने 60 साथियों के साथ सरेंडर किया। ये सरेंडर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में हुआ। सभी ने अपने हथियार सीएम को सौंपे।

भूपति 1980 के दशक से नक्सल मूवमेंट से जुड़ा रहा है। यह तेलंगाना के करीब नगर का रहने वाला है और छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा जैसे कई राज्यों में मोस्ट वांटेड रहा है। उस पर अकेले छत्तीसगढ़ में डेढ़ करोड़ और कुल मिलाकर 6 करोड़ रुपए से अधिक का इनाम था।

भूपति ने सरेंडर का फैसला संगठन पर बढ़ते दबाव और सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी घेराबंदी के चलते लिया।

सुकमा में भी नक्सलवाद को बड़ा झटका लगा।

14 अक्टूबर को 27 सक्रिय नक्सलियों ने SP किरण चव्हाण और CRPF-कोबरा अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। इनमें 10 महिलाएं और 17 पुरुष शामिल हैं। कुल इनामी राशि 50 लाख रुपए थी — किसी पर 10 लाख, 3 पर 8-8 लाख, कुछ पर 3 और 2 लाख, और बाकी पर 1 लाख रुपए का इनाम घोषित था।

ये सभी नक्सली PLGA बटालियन नंबर 01 और रिजनल मिलिट्री कंपनी के हार्डकोर माओवादी माने जाते हैं।

सरेंडर करने वालों ने बताया कि वे सरकार की “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति 2025” और “नियद नेल्ला नार योज    ना” से प्रेरित हैं। संगठन की अमानवीय विचारधारा और सुरक्षा बलों के दबाव के चलते उन्होंने हथियार डालने का फैसला लिया।

सरकार ने सभी आत्मसमर्पण करने वालों को ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि और पुनर्वास सुविधाएं देने की घोषणा की है।

🙏छत्तीसगढ़ में बदलते हालात एक नई उम्मीद की ओर इशारा करते हैं।

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