भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : डोंगरगढ़। नवरात्र समापन की रात डोंगरगढ़ में ऐसा नज़ारा देखने मिला, जिसने हर किसी को भक्ति और परंपरा से जोड़ दिया। मां बम्लेश्वरी मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा में महिलाएं सिर पर ज्योति कलश लिए जयकारों के साथ आगे बढ़ीं। कुल 901 प्रज्वलित कलशों का विसर्जन महावीर तालाब में किया गया, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। तालाब किनारे आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम नजर आया।
यह परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर भी है। विसर्जन यात्रा मंदिर से शुरू होकर छिन्नमस्तिका मंदिर होते हुए रेलवे ट्रैक पार कर मां शीतला मंदिर तक पहुंची। यहां मां शीतला और मां बम्लेश्वरी की माई ज्योत का मिलन करवाया गया, जो पूरे अनुष्ठान की विशेषता है।
इस परंपरा की नींव रियासत काल में रखी गई थी। खैरागढ़ के तत्कालीन शासक राजा लाल उमराव सिंह ने 21 अगस्त 1883 को ब्रिटिश सरकार और बंगाल-नागपुर रेलवे के साथ एक समझौता किया था। इसी समझौते में जमीन देने के साथ शर्त रखी गई थी कि डोंगरगढ़ स्टेशन पर ट्रेनें रुकें और नवरात्र के दौरान ज्योति विसर्जन यात्रा के लिए रेल पटरियों पर ब्लॉक दिया जाए। यही वजह है कि आज भी रेलवे इस परंपरा का सम्मान करता है।
डोंगरगढ़ की नवरात्रि का यह विसर्जन सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और आस्था का संगम है, जिसने देशभर के श्रद्धालुओं को दशकों से अपनी ओर आकर्षित किया है।
🙏लोकल खबरों से जुड़े रहने के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
विज्ञापन
यह भी पढ़े- इन 7 घरेलू उपायों से मच्छरों को कहें अलविदा, बिना धुएं और केमिकल के घर होगा सुरक्षित!
विज्ञापन
यह भी पढ़े -स्मार्ट मीटर में भी चोरी! रायपुर-दुर्ग में एफआईआर, बेमेतरा में ढाई लाख का जुर्माना!
यह भी पढ़े -राशन कार्ड में मोबाइल नंबर अपडेट कैसे करें? जानिए ऑनलाइन व ऑफलाइन तरीका स्टेप-बाय-स्टेप
यह भी पढ़े - भैया को नींद इतनी प्यारी थी... कोबरा भी डिस्टर्ब नहीं कर पाया! पूरी रात कोबरा मच्छरदानी के भीतर युवक के साथ सोता रहा , सुबह देखा तो उड़ गए होश!
यह भी पढ़े -मानसून में भीगे कपड़ों से बदबू और फंगस से पाएं छुटकारा – ये आसान देसी उपाय आपके काम जरूर आएंगे..
भिलाई की पत्रिका न्यूज़ के whatsup ग्रुप से जुड़ने के लिए लिंक पर क्लिक कर ज्वाइन करे




