भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : बीजापुर में गुरुवार को इतिहास रचने वाली घटना सामने आई। छत्तीसगढ़ में अब तक का सबसे बड़ा माओवादी आत्मसमर्पण हुआ, जब 103 नक्सलियों ने एक साथ हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इन पर कुल 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के बाद सभी को शासन की ओर से 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई।
बीजापुर समेत नक्सल प्रभावित इलाकों में आत्मसमर्पण के कई कारण सामने आए हैं। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं के तेजी से पहुंचने, संगठन के अंदरूनी कलह, शीर्ष नेताओं की मौत, शोषण और भविष्य की अनिश्चितता ने माओवादियों को हथियार छोड़ने पर मजबूर किया है।
इस आत्मसमर्पण अभियान में डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ और कोबरा बटालियन जैसी विशेष इकाइयों का भी अहम योगदान रहा। वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति ने माओवादियों को नई उम्मीद दी है। सरेंडर करने वालों को न सिर्फ प्रोत्साहन राशि बल्कि शिक्षा, रोजगार और समाज में दोबारा बसने का मौका भी दिया जा रहा है।
बीजापुर एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने सभी माओवादियों से अपील की है कि वे भ्रामक विचारधारा छोड़कर शासन की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ें। उन्होंने कहा – “आत्मसमर्पण करने वालों के परिजन भी यही चाहते हैं कि वे सामान्य जीवन जिएं और समाज का हिस्सा बनें।”
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