1 करोड़ की लेक्सस कार में खामी! छत्तीसगढ़ उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला – टोयोटा को 45 दिन में नई गाड़ी या ब्याज सहित पूरी रकम लौटाने का आदेश..


भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : रायपुर से बड़ी खबर – छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने 1 करोड़ की लग्जरी कार को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। लेक्सस RX350H हाइब्रिड कार में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पाए जाने पर आयोग ने टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और लेक्सस इंडिया को आदेश दिया है कि वे 45 दिनों के भीतर गाड़ी बदलें या ब्याज सहित पूरी रकम लौटाएं।

यह कार रायपुर की शिवालिक इंजीनियरिंग लिमिटेड के सीएमडी के लिए खरीदी गई थी। आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि 45 दिनों में आदेश का पालन नहीं किया गया, तो ब्याज दर 9% तक बढ़ जाएगी।

Raipur Lexus Car Case – Chhattisgarh Consumer Court Orders Toyota to Replace or Refund

क्या कहा उपभोक्ता आयोग ने

आयोग ने आदेश दिया कि कंपनियां 45 दिनों के अंदर समान मॉडल की नई कार (पंजीयन शुल्क सहित) उपलब्ध कराएं या फिर ₹1,01,31,174 की गाड़ी की कीमत और ₹9,95,000 पंजीयन शुल्क समेत राशि 6% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाएं।

इसके अलावा, मानसिक पीड़ा और प्रताड़ना के लिए ₹50,000 तथा मुकदमे के खर्च के रूप में ₹15,000 भी भुगतान करना होगा।

कैसे सामने आई गाड़ी की खामी

यह कार 13 अक्टूबर 2023 को खरीदी गई थी और यह छत्तीसगढ़ की पहली हाइब्रिड लेक्सस कार थी। खरीदने के कुछ ही दिनों में इसमें स्टार्टिंग प्रॉब्लम, चलते-चलते बंद हो जाना और बैटरी से करंट लीक जैसी गंभीर खराबियां सामने आने लगीं।

कार के पंजीयन में भी छह महीने की देरी हुई क्योंकि कंपनी ने जरूरी दस्तावेज समय पर नहीं दिए। सर्विस के लिए कार को भुवनेश्वर भेजा गया, लेकिन चार महीने बाद जब कार वापस आई तो उसमें डेंट्स और स्क्रैच थे, और खराबियां जस की तस बनी रहीं।

सुरक्षा को बताया खतरा

आयोग ने माना कि यह खराबियां गाड़ी मालिक की सुरक्षा के लिए खतरा थीं। चलते समय कार का अचानक रुक जाना किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।

कंपनियों के तर्क हुए खारिज

शीवालिक इंजीनियरिंग ने एक स्वतंत्र सर्विस सेंटर का सर्टिफिकेट भी पेश किया, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट की पुष्टि की गई थी। कंपनियां इसका संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं।
टोयोटा किर्लोस्कर ने दावा किया कि परिवादी उपभोक्ता नहीं है और बैटरी की समस्या वारंटी में ठीक कर दी गई थी, लेकिन आयोग ने इन दावों को खारिज कर दिया।

आयोग का सख्त रुख

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट, सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के मामलों में कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है।

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