भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ में एक बार फिर किसानों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। 15 नवंबर से पूरे प्रदेश में धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इस बार 26 लाख से ज्यादा किसान अपना धान बेचेंगे। सरकार ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदने की घोषणा की है।
धान बेचने के लिए राज्य भर में 2739 केंद्र बनाए गए हैं, जहां सभी व्यवस्थाएं — जैसे जूट बोरे, तौल मशीन, परिवहन और भंडारण — पूरी कर ली गई हैं। खरीदी 31 जनवरी 2026 तक चलेगी और किसानों को बेचने के 7 दिन के भीतर ही भुगतान उनके बैंक खाते में भेजा जाएगा/

राज्य को इस साल सेंट्रल पूल में 73 लाख टन चावल भेजने का लक्ष्य मिला है। खरीदी प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एग्रीस्टैक पोर्टल और ई-केवायसी प्रणाली लागू की है। अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि खरीदी केंद्र जाने से पहले एग्रीस्टैक रजिस्ट्रेशन, आधार कार्ड, पासबुक, भू-अभिलेख और फसल विवरण साथ रखें।
अवैध परिवहन पर सख्ती
अवैध धान के परिवहन को रोकने के लिए सभी जिलों की सीमाओं पर चेकपोस्ट बनाए जा रहे हैं। ओडिशा और अन्य राज्यों से आने वाले धान को रोकने 16 चेकपोस्ट बनाए जाएंगे। यहां राजस्व, कृषि, वन और पुलिस विभाग की संयुक्त ड्यूटी रहेगी।
लक्ष्य 160 लाख टन धान खरीदी का
पिछले साल 149 लाख टन धान खरीदी की गई थी, जबकि इस बार सरकार ने 160 लाख टन का लक्ष्य रखा है। हर केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे, डिजिटल वजन मशीन और ऑनलाइन डेटा एंट्री सिस्टम लगाए गए हैं। इस बार पूरी खरीदी डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से संचालित होगी।
मार्कफेड बनाएगा कमांड सेंटर
धान खरीदी में पारदर्शिता लाने के लिए मार्कफेड द्वारा “इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर” बनाया जाएगा। इसके साथ जिला स्तर पर भी कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं ताकि किसी तरह की गड़बड़ी या अव्यवस्था को रोका जा सके।
खरीदी केंद्रों में अफसरों की जिम्मेदारी
खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था न हो, इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों को प्रभारी बनाया गया है। वहीं, जिन समितियों में शून्य सूखत (Zero Suhkat) आएगी, उन्हें 5 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
किसानों के लिए ज़रूरी जानकारी
टोकन कैसे मिलेगा?
किसानों को मोबाइल ऐप ‘टोकन तुंहर हाथ’ से टोकन लेना होगा। जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है, वे अपनी सोसाइटी में जाकर ऑफलाइन टोकन ले सकते हैं।
कितने टोकन मिलेंगे?
छोटे और सीमांत किसानों को 2 टोकन, जबकि बड़े किसानों को 3 टोकन मिलेंगे। धान बेचने का पहला मौका छोटे किसानों को दिया जाएगा।
सोसाइटी जाने से पहले तैयारी:
किसान अपने आधे पुराने बोरे खुद लाएंगे, जबकि आधे नए बोरे सरकार उपलब्ध कराएगी। इसलिए साफ-सुथरे बोरे साथ रखें।
धान की नमी:
धान में 17% से ज्यादा नमी नहीं होनी चाहिए। सोसाइटी ले जाने से पहले उसे अच्छी तरह सुखाएं। हर केंद्र पर नमी नापने की मशीन उपलब्ध रहेगी।
तौल और रसीद:
धान सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक कांटे से तौला जाएगा। विक्रय के बाद पक्की रसीद जरूर लें और अंगूठा लगाने के समय स्वयं उपस्थित रहें।
भुगतान व्यवस्था:
धान बेचने के एक सप्ताह के भीतर पैसा किसानों के खाते में PFMS सिस्टम के ज़रिए ट्रांसफर होगा, जो पूरी तरह सुरक्षित है।
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